होम›सुप्रीम कोर्ट›12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: चालान‑बिजली बिल सहित कई रोज़मर्रा के विवादों का त्वरित समाधान
सुप्रीम कोर्ट

12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: चालान‑बिजली बिल सहित कई रोज़मर्रा के विवादों का त्वरित समाधान

छत्तीसगढ़ में 12 सितंबर को सुबह 10 वजे राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी, जहाँ आपसी सहमति से चालान, बिजली बिल और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विवादों को शीघ्र निपटारा किया जाएगा। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत स्थायी लोक अदालतें बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, दुर्ग और सरगुजा में कार्यरत हैं, जो लोगों को लंबी कोर्ट प्रक्रिया और अधिक खर्च से बचाने में मदद करती हैं।

11 सितंबर 2026 को 04:05 am बजे
12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत: चालान‑बिजली बिल सहित कई रोज़मर्रा के विवादों का त्वरित समाधान

सौजन्य से:- Prabhat Khabar

National Lok Adalat : चालान-बिजली बिल समेत कई मामले होंगे हल, 12 सितंबर को मिलेगा मौका

लोक अदालत, Photo: https://chhattisgarh.nalsa.gov.in

National Lok Adalat : लोक अदालत उन लोगों के लिए आसान रास्ता है, जो अदालत की लंबी प्रक्रिया और ज्यादा खर्च से बचना चाहते हैं. यहां कई तरह के विवादों का आपसी सहमति से समाधान कराया जाता है. अगर आप भी किसी मामले का जल्दी निपटारा चाहते हैं, तो जानें छत्तीसगढ़ में लोक अदालत कब लगेगी.

National Lok Adalat : कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत लोगों को जरूरी सेवाओं से जुड़े विवादों का समाधान देने के लिए स्थायी लोक अदालतें बनाई गई हैं. छत्तीसगढ़ में बिलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में ये अदालतें साल 2007 से काम कर रही हैं. वहीं, दुर्ग और सरगुजा के अंबिकापुर में वर्ष 2011 से स्थायी लोक अदालतें चल रही हैं.

लोक अदालत में आम लोगों से जुड़ी कई जरूरी सेवाओं के विवाद सुलझाए जाते हैं. इनमें बस और दूसरी परिवहन सेवाएं, डाक, टेलीफोन, बिजली और पानी की सप्लाई से जुड़े मामले शामिल हैं. सार्वजनिक सफाई, अस्पताल, डिस्पेंसरी, बीमा और बैंक से जुड़े विवाद भी यहां रखे जा सकते हैं. इसके अलावा ईंधन की सप्लाई, स्कूल-कॉलेज, घर और जमीन-मकान से जुड़े मामलों में भी मदद मिल सकती है.

कब लगेगी लोक अदालत?

12 सितंबर को लोक अदालत लगने वाली है. इसकी जानकारी chhattisgarh.nalsa.gov.in में दी गई है. वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, 12 सितंबर को लोक अदालत सुबह 10 बजे से लग जाएगी. इसका मकसद लोगों को लंबे समय तक कोर्ट के चक्कर लगाने से बचाना है. यहां दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का आसान और जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जाती है.

राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में जानें और चीजें

- नेशनल लेवल पर लोक अदालतें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाती हैं. एक तय दिन को देशभर की अदालतों में एक साथ लोक अदालत लगाई जाती है.

- लोक अदालत का मकसद एक साथ बड़ी संख्या में मामलों का समाधान करना है. इसमें सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला और तालुका स्तर की अदालतों में चल रहे मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने की कोशिश की जाती है.

- हर महीने अलग-अलग तरह के मामलों पर ध्यान दिया जाता है. इससे एक जैसे कई मामलों को एक साथ सुलझाने में आसानी होती है. इसका फायदा यह है कि लोगों के मामलों का जल्द निपटारा हो सकता है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
मेरठ आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 108 नई दुकानों का निर्माण शुरू किया
सुप्रीम कोर्ट

मेरठ आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 108 नई दुकानों का निर्माण शुरू किया

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या महिलाएं सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं?
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: क्या महिलाएं सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी: ‘अधिकारियों को महाशक्तिशाली CEC से निष्क्रिय बना दें’
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी: ‘अधिकारियों को महाशक्तिशाली CEC से निष्क्रिय बना दें’

सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू स्टाफ की भर्ती को 6 महीनों, बुनियादी ढांचा 9 महीनों में पूरा करने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आईसीयू स्टाफ की भर्ती को 6 महीनों, बुनियादी ढांचा 9 महीनों में पूरा करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध रिहायशी‑व्यावसायिक निर्माणों पर विशेष आयोग स्थापित किया

क्या महिलाएं सुरक्षा के लिये हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
सुप्रीम कोर्ट

क्या महिलाएं सुरक्षा के लिये हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की बैठक में मतदाता सूची एसआईआर पर ली गई मुख्य मंज़ूरियाँ
सुप्रीम कोर्ट

ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की बैठक में मतदाता सूची एसआईआर पर ली गई मुख्य मंज़ूरियाँ

क्या महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
सुप्रीम कोर्ट

क्या महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रख सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण

ताज़ा ख़बरें