22 अगस्त को इतिहास में क्या हुआ
22 अगस्त को इतिहास में क्या हुआ ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जानिए 22 अगस्त को इतिहास में क्या-क्या हुआ था. मद्रास से चेन्नई, 350 सालों में कैसे बदला शहर? 22 अगस्त 1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोरोमंडल तट पर जम…

सौजन्य से:- DW.com
22 अगस्त को इतिहास में क्या हुआ
ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जानिए 22 अगस्त को इतिहास में क्या-क्या हुआ था.
मद्रास से चेन्नई, 350 सालों में कैसे बदला शहर?
22 अगस्त 1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोरोमंडल तट पर जमीन लेकर अपना व्यापारिक ठिकाना बनाया. इसके बाद वहां सेंट जॉर्ज किले का निर्माण हुआ, जो धीरे-धीरे ब्रिटिश सत्ता और व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया. 18वीं सदी तक अंग्रेजों ने आसपास के बड़े इलाके पर नियंत्रण कर मद्रास प्रेसिडेंसी बनाई और मद्रास को उसकी राजधानी बनाया. 1996 में तमिलनाडु सरकार ने मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई कर दिया.
लेनी रिफेनश्टाल का सिनेमा या नाजी प्रोपगेंडा?
22 अगस्त 1902 को जर्मनी के बर्लिन में लेनी रिफेनश्टाल का जन्म हुआ. वह नाजी शासन और अडोल्फ हिटलर से उनकी करीबी के कारण फिल्म इतिहास की सबसे विवादित हस्तियों में गिनी जाती हैं. 1932 में उन्होंने फिल्म ‘द ब्लू लाइट’ से निर्देशन की शुरुआत की थी. लेकिन बाद में हिटलर और नाजी पार्टी की रैलियों पर उन्होंने फिल्म बनाई. जब बात नाजी प्रोपगेंडा की हो, तो लेनी रिफेनश्टाल का काम भी घेरे में आता है.
दुनिया का पहला परमाणु व्यापारिक जहाज
22 अगस्त 1962 को दुनिया का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला पहला व्यापारिक जहाज अपनी पहली यात्रा के दौरान अमेरिका के जॉर्जिया पहुंचा. इसका मकसद परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल की संभावनाओं को दुनिया के सामने दिखाना था. हालांकि, कई बंदरगाहों ने इसे विकिरण के खतरे के कारण प्रवेश देने से इनकार कर दिया.
जर्मन दूतावास कैसे बना शरणार्थियों का ठिकाना?
22 अगस्त 1989 को प्राग में पश्चिम जर्मनी के दूतावास को भीड़ बढ़ने के कारण बंद करना पड़ा. उस समय कई पूर्वी जर्मन नागरिक पश्चिम जर्मनी जाने की आस में वहां पहुंचे थे. बढ़ते दबाव के बीच इन लोगों को विशेष ट्रेनों से पश्चिम जर्मनी भेजने का फैसला लिया गया. जब पश्चिमी जर्मनी के तत्कालीन विदेशी मंत्री ने दूतावास की बालकनी से इस बात की घोषणा की, उस वक्त वहां लगभग 4000 लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे थे.
ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
22 अगस्त 2017 को भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराते हुए इसे अमान्य घोषित कर दिया. पांच जजों की संविधान पीठ में तीन न्यायाधीशों ने इसे असंवैधानिक माना जबकि दो की राय अलग थी. 1 अगस्त 2019 को लागू हुए इस कानून के तहत मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिया गया तत्काल तीन तलाक, अवैध बन गया और इसके दोषियों के लिए सजा का प्रावधान तय हुआ.
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