अदालत से:::पूर्व पुलिस अधिकारी को 23 साल बाद मिलेगा राष्ट्रपति पदक
अदालत से:::पूर्व पुलिस अधिकारी को 23 साल बाद मिलेगा राष्ट्रपति पदक -केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी -मुठभेड़ में दो डकैतों को मार गिराया नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2003…

सौजन्य से:- Hindustan
अदालत से:::पूर्व पुलिस अधिकारी को 23 साल बाद मिलेगा राष्ट्रपति पदक
-केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी -मुठभेड़ में दो डकैतों को मार गिराया
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2003 में एक अभियान के दौरान दो डकैतों को मार गिराने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक सिंह चौहान को वीरता के लिए ‘राष्ट्रपति पदक’ दिए जाने की मंजूरी दे दी गई है।
केंद्र सरकार की नाराजगी
शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस निर्देश का पालन नहीं किए जाने पर जुलाई में केंद्र के प्रति नाराजगी जताई थी, जिसमें पूर्व पुलिस अधिकारी चौहान को यह पदक देने को कहा गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि इस संबंध में फैसला ले लिया गया है और राष्ट्रपति ने चौहान को वीरता के लिए ‘राष्ट्रपति पदक’ दिए जाने को मंजूरी दे दी है। पीठ केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गृह सचिव ने हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसमें निर्देश का पालन नहीं करने पर उन्हें अवमानना का प्रथम दृष्टया दोषी माना गया था।
2003 की घटना
बता दें कि चौहान 2003 में ग्वालियर जिले के घाटीगांव थाने के प्रभारी थे। उन्होंने एक गांव में डकैतों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद उनके खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया था। इस मुठभेड़ में दो डकैत मारे गए थे और चौहान भी घायल हो गए थे। मजिस्ट्रेट जांच में उन्हें दोषमुक्त किए जाने के बाद समय से पहले पदोन्नति और वीरता के लिए ‘राष्ट्रपति पदक’ देने की सिफारिश की गई थी। कई वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को पुरस्कार के लिए उनका नाम केंद्र को भेजने का निर्देश दिया था। मध्य प्रदेश सरकार ने 2019 में उनके नाम की सिफारिश की, लेकिन गृह मंत्रालय ने उसी वर्ष बाद में दावे को खारिज कर दिया था।
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