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हाई कोर्ट का नया आदेश: स्ट्रीट वेंडरों को जब्ती के 24 घंटे में सीज़र मेमो मिलेगा

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेहड़ी‑पटरी वेंडरों के पक्ष में निर्देश दिया कि MCD और NDMC को जब्त किए गए सामान की सूचना 24 घंटे के भीतर लिखित सीज़र मेमो के रूप में देनी होगी, जिसमें तिथि, सूची, वेयरहाउस विवरण, जुर्माना और अधिकारी का हस्ताक्षर शामिल हो। कोर्ट ने साथ ही हर जब्ती अभियान की वीडियो‑फ़ोटो रिकॉर्डिंग और विस्तृत सूची तैयार करने को भी अनिवार्य किया।

12 सितंबर 2026 को 03:04 am बजे
हाई कोर्ट का नया आदेश: स्ट्रीट वेंडरों को जब्ती के 24 घंटे में सीज़र मेमो मिलेगा

सौजन्य से:- Navbharat Times

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेहड़ी-पटरी वेंडरों के हक में बड़ा फैसला सुनाते हुए MCD और NDMC को सामान जब्त करने के 24 घंटे के भीतर 'सीजर मेमो' देना अनिवार्य कर दिया है।

नई दिल्लीः स्ट्रीट वेंडरों का सामान जब्त करने की प्रक्रिया को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि नगर निकाय को सामान जब्त करने के 24 घंटे के भीतर वेंडर को जब्ती मेमो (सीजर मेमो) देना होगा। मेमो में जब्ती की तारीख, जब्त सामान की पूरी सूची, वेयरहाउस का शेल्फ नंबर, जुर्माने की रकम और कार्रवाई करने वाले अधिकारी का नाम, पद और साइन दर्ज होने चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका का किया निपटारा

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने 10 सितंबर को यह निर्देश 'रेहड़ी पटरी एकता मंच' की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिए। याचिका में MCD और NDMC की जब्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। आरोप था कि अधिकारी कई बार मौके पर सामान की सूची या मेमो दिए बिना सामान उठा ले जाते हैं। बाद में वेंडर को सिर्फ जुर्माने की रसीद दी जाती है।

सुनवाई के दौरान नगर निकाय ने दलील

नगर निकाय की ओर से दलील दी गई कि मौके पर मेमो तैयार करने से आसपास के दूसरे नियम तोड़ने वाले वेंडरों को कार्रवाई की जानकारी मिल जाती है और वे मौके से भाग सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 की धारा 19 के तहत जब्त सामान की विस्तृत सूची तैयार करना और प्रभावित वेंडर को उपलब्ध कराना जरूरी है। मेमो देने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की है। कोर्ट ने MCD को NDMC की तर्ज पर हर जब्ती अभियान की अनिवार्य विडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराने को भी कहा।

लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें

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