सरकार को बड़ा झटका: फंड की कमी का बहाना बनाकर मुआवजा देने में देरी नहीं कर सकती
दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकार फंड की कमी का बहाना बनाकर अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकती। कोर्ट ने 4 महीने में फैसला लेने का आदेश दिया है। यह फैसला उन जमीन मालिकों के लिए राहत भरा है जिनकी जमीन सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित होने के बाद भी मुआवजा लंबे समय से अटका हुआ है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: फंड की कमी कहकर मुआवजा नहीं टाल सकती सरकार, 4 महीने में फैसला लेने का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकार फंड की कमी का बहाना बनाकर अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकती।
क्या है मामला
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने यह टिप्पणी पूठ खुर्द की अधिग्रहित जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान 8 जुलाई को की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी जमीन का अधिग्रहण दिल्ली के नियोजित विकास के तहत 100 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए किया गया था लेकिन सालों बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा, फंड की कमी होने के कारण भुगतान नहीं हो सका। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि फंड की कमी का बहाना बनाकर जमीन मालिकों को अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुआवजा देने के संबंध में फैसला चार महीने में लिया जाए। आप पर असर
यह फैसला उन सभी जमीन मालिकों के लिए राहत भरा है, जिनकी जमीन सरकारी परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित होने के बाद भी मुआवजा लंबे समय से अटका हुआ हुआ है। है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकार फंड की कमी का बहाना बनाकर भुगतान टाल नहीं सकती। इससे प्रभावित लोगों को समय पर मुआवजा पाने के अधिकार को मजबूती मिलेगी। यह आदेश सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करता है और संदेश देता है कि यह सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है।कन्वर्सेशन शुरू करें
Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को विवादास्पद नागरिकता डेटाबेस के उपयोग की स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत
- कानून का सही उपयोग: बहादुरपुर में एससी-एसटी अधिनियम पर बैठक
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की, आदेश से नहीं थोप सकते भाषा
- एपी हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी मानने के बाद तीन‑राजधानी प्रस्ताव को निरर्थक घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं रोका SIR?
- महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह की बरी को चुनौती, दिल्ली कोर्ट में दायर की अपील
- ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश

