शिक्षा विभाग के 43 मामले सुलझेंगे सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में
सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में 21 से 23 अगस्त तक शिक्षा विभाग के 43 मामले सुलझेंगे। बिहार के हैं और इनमें नियोजन इकाई की बहाली प्रक्रिया से लेकर वरीयता अनियमितता के मामले शामिल हैं।

सौजन्य से:- Hindustan
सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में सुलझेंगे शिक्षा विभाग के 43 मामले
सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में शिक्षा विभाग के 43 मामले सुलझेंगे। ये मामले बिहार के हैं और इनका समाधान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपर स्थाई सलाहकार को प्राधिकृत किया है। विशेष लोक अदालत 21 से 23 अगस्त तक लगेगी। डीईओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में शिक्षा विभाग के 43 मामले सुलझेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के ये मामले चिह्नित किए हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े इन मामलों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपर स्थाई सलाहकार को प्राधिकृत किया गया है।
विशेष लोक अदालत का आयोजन
21 से 23 अगस्त तक सर्वोच्च न्यायालय में विशेष लोक अदालत लगने जा रही है। जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकार के जरिए वादी-प्रतिवादी को बुलाकर हल का निर्देश मिला है। जिलों में डीईओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है। 27 जुलाई तक विभाग के अपर सचिव ने सभी जिलों से इसपर रिपोर्ट मांगी है। अपर सचिव सह नोडल अधिकारी विजय कुमार ने सभी डीईओ को निर्देश दिया है कि हर जिले के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव का नाम और फोन नंबर की सूची भी जारी की गई है, जिनके साथ डीईओ समन्वय करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से भेजी गई सूची की समीक्षा करते हुए समन्वय बनाएंगे। प्राधिकार से प्राप्त समाधान की रिपोर्ट डीईओ निदेशालय को उपलब्ध कराएंगे।
मामलों का समाधान
बहाली प्रक्रिया व वरीयता अनियमितता का होगा समाधान
सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत में शिक्षा विभाग के जिन 43 मामले चिन्हित किए गए हैं, उनमें कई 2012-13 के हैं तो कई साल 2024 के हैं। नियोजन इकाई की बहाली प्रक्रिया से लेकर वरीयता अनियमितता के मामले का समाधान कराने की सुप्रीम कोर्ट की पहल है। कई चर्चित मामले भी हैं। एक मामला विश्वभारती बनाम बिहार राज्य और अन्य हैं। यह मामला मुख्य रूप से प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा शर्त से जुड़ा है। इसमें पंचायत, प्रखंड और नगर निकाय समितियों द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा है। नियुक्ति प्रक्रिया में वरीयता और सेवा शर्त के उल्लघंन का आरोप लगाया गया था। इसी तरह एक मामला भारती कुमारी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया है.
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