पति की आय बताना पत्नी की जिम्मेदारी, अलग रहें तो मना न समझें: इलाहाबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अलग रह रही पत्नी से पति की आय का सुबूत मांगना निरर्थक है। आय के सुबूत के लिए गणितीय सटीकता नहीं मांगता कानून। कोर्ट पति की शैक्षिक योग्यता, नौकरी का इतिहास, संपत्ति और आसपास की परिस्थितियों से उसकी कमाई के बारे में अंदाजा लगा सकता है।

सौजन्य से:- Jagran
पति की आय का सुबूत पत्नी से मांगना बेमानी, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में अहम टिप्पणी की है कि अलग रह रही पत्नी से पति की आय का सुबूत मांगना निरर्थक है। ...और पढ़ें
HighLights
- पत्नी से पति की आय का सुबूत मांगना निरर्थक।
- कोर्ट पति की योग्यता, संपत्ति से आय का अनुमान लगाएगा।
- फैमिली कोर्ट का 10 हजार मासिक भत्ता आदेश सही।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कहा है कि अलग रह रही पत्नी से यह उम्मीद निरर्थक है कि वह पति की कमाई के दस्तावेजी सुबूत पेश करेगी। कानून आय के सुबूत के लिए गणितीय सटीकता नहीं मांगता।
कोर्ट पति की शैक्षिक योग्यता, नौकरी का इतिहास, संपत्ति और आसपास की परिस्थितियों से उसकी कमाई की क्षमता का अंदाजा लगा सकता है। ऐसी टिप्पणियों के साथ न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकलपीठ ने संभल निवासी विकास शर्मा की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए चंदौसी परिवार न्यायालय के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें पत्नी पूजा शर्मा को आवेदन की तारीख से 10 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने और 60 दिनों में बकाया चुकाने को कहा गया था।
विपक्षी पूजा ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत केस दायर किया था। आरोप था कि 12 दिसंबर 2020 को शादी के बाद पांच लाख रुपये और चार पहिया गाड़ी के लिए प्रताड़ित किया गया। मांग पूरी नहीं होने पर 21 जून 2022 को मारपीट कर घर से निकाल दिया।
विपक्षी ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ चंदौसी थाने में धारा 307, 498-ए (दहेज अधिनियम) में केस भी दर्ज कराया। फैमिली कोर्ट ने 17 मई 2024 को 10 हजार महीना भत्ता तय किया। विकास ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। कहा, फैमिली कोर्ट ने सुबूत ठीक से नहीं देखे। पत्नी बिना वजह मायके गई और उसकी आय का कोई पुख्ता सुबूत नहीं है।
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रिकॉर्ड देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि जब पति खुद पत्नी को रखने से मना कर रहा है, तो यह नहीं माना जा सकता कि पत्नी बिना कारण अलग रह रही है। विकास ने दांपत्य बहाली का कोई मुकदमा भी नहीं किया है।
पूजा का दावा था कि विकास प्राइवेट टीचर है और कोचिंग से करीब 1.50 लाख महीना कमाता है। किराये से भी आय है। विकास ने खुद को बेरोजगार बताया, लेकिन अपने पक्ष में कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
कोर्ट ने दोहराया कि आय की जानकारी देना पति की जिम्मेदारी है। पत्नी ने आय के स्रोत बताए हैं तो सुबूत देने का भार पति पर आ गया। तथ्य छिपाने पर कोर्ट प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो पक्ष प्रमाण रोकता है, माना जाता है कि वे उसके खिलाफ हैं। कोर्ट की राय में विकास पढ़ा-लिखा सक्षम है और पहले सोनीपत में शिक्षक रह चुका है। उसके पास मकान भी है। ऐसे में 10 हजार रुपये महीना गुजारा भत्ता न ज्यादा है, न गलत। महंगाई के दौर में यह राशि उचित है। पीठ ने कहा, फैमिली कोर्ट के आदेश में दखल की कोई वजह नहीं बनती।
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