APAAR ID: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया CBSE को दिशा-निर्देशों का पालन करने को निर्देश, जानें क्या है फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को देशभर में APAAR ID योजना का लागू हो जाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित किया है। हाईकोर्ट के निर्देशों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने के लिए कहा गया है। साथ ही, जांच के लिए कहा गया है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दे कैसे हल किए जा सकते हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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APAAR ID क्या होती है , APAAR ID का उद्देश्य क्या है?
दरअसल, यह शिक्षा मंत्रालय की एक नई पहल है। जिसके जरिए शिक्षा मंत्रालय की कोशिश है कि ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’का नियम बने। इसका उद्देश्य प्रत्येक छात्र को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान देना है। इस ID के माध्यम से छात्र की मार्कशीट, प्रमाणपत्र, उपलब्धियां और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखे जाते हैं।सरकार का कहना है कि इससे छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन आसान होगा और संस्थानों के बीच रिकॉर्ड स्थानांतरण में सुविधा मिलेगी। यह रिकॉर्ड स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक उपयोग में लाया जा सकता है। यह व्यवस्था DigiLocker जैसी डिजिटल प्रणालियों से भी जुड़ती है। सरकार इसे शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है।
मामले की शुरुआत और उड़ीसा हाईकोर्ट का फैसला
- इस मामले की शुरूआत तब हुई जब कुछ अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया कि व्यवहार में APAAR ID को अनिवार्य बनाया जा रहा है, जबकि सरकार इसे स्वैच्छिक योजना बताती है।
- याचिकाकर्ताओं का कहना है कि APAAR, आधार से जुड़ा होने के कारण बच्चों की निजता के अधिकार पर असर डाल सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि योजना किसी विशेष कानून के बजाय प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से लागू की जा रही है।
- अदालत में यह मुद्दा भी उठा कि यदि कोई अभिभावक सहमति न दे तो बच्चे की शिक्षा या परीक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। सुनवाई के दौरान डेटा संरक्षण, व्यक्तिगत जानकारी के संग्रहण और प्रसंस्करण को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए।
- इस विषय से जुड़े ओडिशा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यदि APAAR योजना वास्तव में स्वैच्छिक है तो सहमति फॉर्म में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से सहमति न देने या ऑप्ट-आउट का विकल्प भी उपलब्ध होना चाहिए।
- हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी छात्र को APAAR ID न बनवाने के कारण शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
APAAR ID पर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
- सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना भी शामिल थे, अपार आईडी योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
- तथ्यों पर ध्यान देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हालिया सुनवाई में संकेत दिया कि इन दिशा-निर्देशों को देशभर में लागू करने के लिए CBSE को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। अदालत ने CBSE से ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देशों को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने और डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार करने को कहा है।
- शीर्ष अदालत ने मामले में कहा कि हम CBSE को कहेंगे कि वह ओडिशा हाईकोर्ट के फैसले को पूरे देश में लागू करे। क्योंकि सरकार ने उस आदेश का विरोध नहीं किया, इसका मतलब वह स्वीकार किया जा चुका है। साथ ही हम CBSE को डेटा सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों की भी जांच करने का निर्देश देंगे।
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