बांदा जिले में अदालत का निर्णय: निगरानी याचिका खारिज
बांदा की विशेष अदालत ने महिला ममता शर्मा की क्रिमिनल रिवीजन याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। महिला ने अपने पति अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ धारा 341 और 506 आईपीसी के तहत केस दर्ज कराया था। अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश सही ठहराया।

सौजन्य से:- Hindustan
Banda News: अदालत ने खारिज की निगरानी याचिका
Banda News: बांदा की विशेष अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश सही ठहराया। महिला ममता शर्मा ने अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 341 और 506 के तहत केस दर्ज कराया था। अदालत ने सीजेएम कोर्ट के फैसले को सही माना।
Banda News: बांदा। विशेष अदालत ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त कर प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद (शिकायत केस) के रूप में दर्ज करने के आदेश को सही ठहराया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने महिला की क्रिमिनल रिवीजन याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। कालू कुआं निवासी ममता शर्मा ने अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ धारा 341 और 506 आईपीसी के तहत केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस पर वादी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की।
सीजेएम कोर्ट ने 25 सितंबर 2025 को पुलिस की रिपोर्ट को नामंजूर करते हुए मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर वादिनी को बयान के लिए तलब किया था। विशेष अदालत का निर्णय वादिनी ने सीजेएम के इस आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए विशेष अदालत में चुनौती दी और मामले को पुलिस केस के तौर पर ही चलाने की मांग की। विशेष अदालत ने पत्रावली का बारीकी से अध्ययन करने के बाद स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय की विधिक व्यवस्थाओं के अनुसार मजिस्ट्रेट को फाइनल रिपोर्ट पर प्रोटेस्ट पिटीशन को परिवाद में बदलने का पूरा अधिकार है। सीजेएम कोर्ट ने अपने क्षेत्राधिकार के भीतर रहकर सही फैसला लिया है।
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