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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनमोहन ने नालंदा विश्वविद्यालय की ‘नेट‑जीरो परिसर’ और सतत विकास पहलों की प्रशंसा की

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनमोहन ने नालंदा विश्वविद्यालय के शिक्षा‑शोध के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के लिए की गई पहलों की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनुकरणीय है।

13 सितंबर 2026 को 01:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनमोहन ने नालंदा विश्वविद्यालय की ‘नेट‑जीरो परिसर’ और सतत विकास पहलों की प्रशंसा की

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मनमोहन ने कहा- शिक्षा-शोध के साथ समाज और पर्यावरण के लिए काम करना सराहनीय

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एजुकेशन रिपोर्टर | बिहारशरीफ

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश मनमोहन शनिवार को धर्मपत्नी के साथ नालंदा विश्वविद्यालय पहुंचे। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने उनका स्वागत किया।

इस दौरान न्यायमूर्ति मनमोहन ने विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, शोध कार्यों, समाज से जुड़ी पहलों की जानकारी ली। विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें नेट-जीरो परिसर, सतत विकास, आसपास के समुदायों के साथ मिलकर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई।

गांवों में सतत विकास लक्ष्यों पर हो रहा काम : प्रस्तुति के दौरान बताया गया कि विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध के साथ आसपास के गांवों में सतत विकास लक्ष्यों को जमीन पर उतारने की दिशा में भी काम कर रहा है। बिहार सरकार के सहयोग से गांवों में सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में किए जा रहे कार्यों पर रिपोर्ट तैयार की गई है। कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, सहभागिता गतिविधियों की जानकारी दी। न्यायमूर्ति मनमोहन को विश्वविद्यालय की पहल ‘शास्त्रार्थ’ के बारे में भी बताया गया। इसकी एक प्रति भेंट की गई।

बोले- देश के संस्थानों को नालंदा के काम पर ध्यान देना चाहिए न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि देशभर के शैक्षणिक संस्थानों को नालंदा में किए जा रहे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। नेट-जीरो परिसर, सतत विकास की दिशा में विश्वविद्यालय की पहल अन्य विश्वविद्यालयों के लिए उदाहरण है। नालंदा में काम सिर्फ शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है। समाज के लिए कुछ करने की भावना भी दिखाई देती है। ऐसी सोच को प्रोत्साहित और सराहा जाना चाहिए।

शिक्षा के साथ पर्यावरण और समाज की पाठशाला भी नालंदा विश्वविद्यालय का मॉडल सिर्फ आधुनिक परिसर तैयार करने तक सीमित नहीं है। नेट-जीरो परिसर के साथ आसपास के गांवों में सतत विकास लक्ष्यों पर काम इसे अलग पहचान देता है। यही वजह है कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने भी इसकी पहल को देश के दूसरे विश्वविद्यालयों के लिए अनुकरणीय बताया।

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