होम›मुकदमे›घुमारवीं कोर्ट ने लिखित उत्तर में देरी को मान्य कर दी अतिरिक्त समय की राहत
मुकदमे

घुमारवीं कोर्ट ने लिखित उत्तर में देरी को मान्य कर दी अतिरिक्त समय की राहत

घुमारवीं के सिविल जज कोर्ट नंबर‑3 ने प्रतिवादी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को मान्य कर अतिरिक्त समय देने का आवेदन स्वीकार किया। कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि न्याय केवल तकनीकी पहलुओं पर नहीं, बल्कि मामले के गुण‑दोष पर आधारित होना चाहिए। प्रतिवादी ने बताया कि देरी अनजाने में और सद्भावना से हुई, जबकि वादी ने इस आवेदन को खारिज करने की मांग की।

4 सितंबर 2026 को 07:31 pm बजे
घुमारवीं कोर्ट ने लिखित उत्तर में देरी को मान्य कर दी अतिरिक्त समय की राहत

सौजन्य से:- Amar Ujala

{"_id":"6a9b0fdb00077e8635063241","slug":"ghumarwin-court-grants-relief-regarding-delay-in-filing-written-reply-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-166987-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: लिखित जवाब में देरी पर घुमारवीं अदालत ने दी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}

Bilaspur News: लिखित जवाब में देरी पर घुमारवीं अदालत ने दी राहत

विज्ञापन

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

कहा- मामला तकनीकी आधार पर नहीं, गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।

प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

विज्ञापन

विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।

प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।

विज्ञापन

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

विज्ञापन

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?
मुकदमे

ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत
मुकदमे

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल
मुकदमे

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं
मुकदमे

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी
मुकदमे

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना
मुकदमे

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
मुकदमे

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्‍स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न

ताज़ा ख़बरें