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कोलकाता अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक - calcutta high court stays kolkata illegal demolition

कोलकाता अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोलकाता के टॉलीगंज में एक अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई पर 30 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है। HighLights - कलकत्ता हाई…

23 अगस्त 2026 को 10:54 pm बजे
कोलकाता अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक
 - calcutta high court stays kolkata illegal demolition

सौजन्य से:- Jagran

कोलकाता अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोलकाता के टॉलीगंज में एक अवैध निर्माण को तोड़ने की कार्रवाई पर 30 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है।

HighLights

- कलकत्ता हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण पर रोक लगाई।

- टॉलीगंज में नगर निगम की कार्रवाई पर स्थगन आदेश।

- अदालत ने 30 दिन का नोटिस अनिवार्य बताया।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के टॉलीगंज में अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर रविवार को शुरू हुई कार्रवाई पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति राजा बसुचौधरी की विशेष पीठ ने निर्देश दिया कि अगले 30 दिनों तक नगर निगम तोड़फोड़ का नोटिस लागू नहीं कर सकेगा। साथ ही मौके पर पहुंचा बुलडोजर भी रुक गया।

टॉलीगंज के 51/1ए और 51/1बी, सतीश मुखर्जी रोड स्थित निर्माण को लेकर अवैध होने की शिकायत सामने आई थी। कोलकाता नगर निगम ने इसे तोड़ने की तैयारी की थी। रविवार को निर्माण गिराने के लिए बुलडोजर पहुंचा और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। इस दौरान पुलिस और स्थानीय निवासियों के बीच बहस भी हुई।

नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय निवासी अनिता दास ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने रविवार को ही मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती की अनुमति के बाद छुट्टी के दिन विशेष पीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह लंबे समय से उक्त पते पर रह रही हैं। नगर निगम ने पहले भी उन्हें बेदखली और निर्माण तोड़ने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। इसके बावजूद रविवार सुबह करीब 11 बजे निर्माण तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

कोर्ट ने कहा कि निर्माण तोड़ने के नोटिस के बाद संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। अदालत के अनुसार, पिछले सप्ताह नोटिस जारी करने के महज तीन दिन बाद निर्माण गिराने की कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं है।

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