चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के पास कोई रिकॉर्ड नहीं, मुख्य प्रशासक की अदालत में लंबित मामलों की जानकारी नहीं
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के पास मुख्य प्रशासक की अदालत में लंबित अपीलों और मामलों का रिकॉर्ड नहीं होने का खुलासा किया है। गर्ग ने कहा है कि यदि रिकॉर्ड ही नहीं है तो केस मैनेजमेंट, समीक्षा और निगरानी कैसे की जाएगी।

सौजन्य से:- Jagran
मुख्य प्रशासक की अदालत में कितने मामले लंबित, चंडीगढ़ प्रशासन के पास नहीं रिकाॅर्ड; पारदर्शिता पर उठे सवाल
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के पास मुख्य प्रशासक की अदालत में लंबित अपीलों और मामलों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग ने इस खुलासे पर पारद ...और पढ़ें
HighLights
- आरटीआई एक्टविस्ट आरके गर्ग ने उठाया सवाल।
- रिकाॅर्ड ही नहीं है तो केस मैनेजमेंट और निगरानी कैसे।
- पिछले 10 वर्षों में 921 नए मामले दर्ज, 1063 निस्तारित।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के पास मुख्य प्रशासक एवं वित्त सचिव की अदालत में लंबित अपीलों और मामलों का रिकॉर्ड नहीं है। यह खुलासा होने के बाद पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग ने प्रशासन ने वर्ष 2016 से 2025 तक दर्ज और निस्तारित मामलों की जानकारी मांगी थी। इसका विवरण तो प्रस्तुत किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि वर्तमान में कुल कितने मामले लंबित हैं और उनमें से कितने वर्षों से विचाराधीन हैं।
प्रशासन के सभी आला अधिकारियों के पास सुनवाई होती है, जिसमें वित्त सचिव मुख्य प्रशासक का चार्ज संभालते हैं। पिछले वर्ष एक अधिकारी की सुनवाई के दौरान एक सीनियर सिटीजन की मृत्यु भी हुई थी।
आरके गर्ग ने सवाल उठाया कि यदि अदालत में लंबित मामलों का रिकाॅर्ड ही उपलब्ध नहीं है तो केस मैनेजमेंट, समीक्षा और निगरानी कैसे की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में मुख्य प्रशासक की अदालत में 445 अपीलें दायर हुईं।
औसतन हर तीन दिन में दो अपील या हर महीने करीब 20 अपील दाखिल हुईं। इसके बावजूद प्रशासन के पास यह जानकारी नहीं है कि वर्तमान में कितनी अपीलें लंबित हैं।
गर्ग का कहना है कि केवल निस्तारित मामलों के आंकड़े सार्वजनिक करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक पारदर्शिता तभी होगी जब लंबित मामलों की कुल संख्या, उनकी आयु-वार स्थिति और वर्षवार बैकलाॅग भी सार्वजनिक किया जाए।
आरटीआई के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में मुख्य प्रशासक की अदालत में 921 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 1,063 मामलों का निस्तारण किया गया। यह दर्शाता है कि निस्तारित मामलों की संख्या दर्ज मामलों से 142 अधिक है।
हालांकि, वर्षवार आंकड़ों में असामान्य अंतर दिखाई देता है। वर्ष 2017 में 90 नए मामले दर्ज हुए, लेकिन केवल आठ मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं, 2019 में 48 नए मामलों के मुकाबले 160 और 2023 में 173 नए मामलों के मुकाबले 236 मामलों का निस्तारण हुआ।
आरटीआई के जवाब में जन सूचना अधिकारी ने कहा कि कार्यालय अलग से लंबित मामलों का रिकार्ड नहीं रखता। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी जानकारी तैयार करना सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत नई सूचना तैयार करने के समान होगा, जिसकी बाध्यता नहीं है।
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