गन्ना श्रमिक ठेकेदारों को विनियमित करने वाला महाराष्ट्र कानून छह महीने से लंबित
महाराष्ट्र सरकार ने गन्ना श्रमिक ठेकेदारों को विनियमित करने और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने के लिए एक कानून प्रस्तुत किया है, लेकिन यह छह महीने से लंबित पड़ा है। इस कानून के मसौदे पर मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने कई आपत्तियां जताई हैं, जिसके कारण अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

सौजन्य से:- ChiniMandi
मुंबई: गन्ना कटाई ठेकेदारों को विनियमित करने और गन्ना श्रमिकों से जुड़े वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से प्रस्तावित महाराष्ट्र कानून पिछले छह महीनों से लंबित पड़ा है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति अब तक इस विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप नहीं दे सकी है। सहकार विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल की अध्यक्षता वाली उपसमिति ने कई बैठकें की हैं, लेकिन कई सदस्यों की अनुपस्थिति और विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर उठी आपत्तियों के कारण अब तक सहमति नहीं बन पाई है।
यह कानून गन्ना श्रमिक ठेकेदारों (जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘मुकादम’ कहा जाता है) से जुड़ा है, और बड़े पैमाने पर सामने आई अनियमितताओं के बाद प्रस्तावित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, कई ठेकेदारों पर आरोप है कि उन्होंने गन्ना मिलों से श्रमिक उपलब्ध कराने के नाम पर अग्रिम भुगतान लिया, लेकिन पेराई सीजन के दौरान श्रमिक उपलब्ध नहीं कराए। कई मामलों में ठेकेदार श्रमिकों को भुगतान किए बिना गायब हो गए या श्रमिक भेजने से पहले मिलों से अतिरिक्त राशि की मांग की।
राज्य सरकार पहले ही खुलासा कर चुकी है कि 10,719 श्रमिक ठेकेदारों पर लगभग 520 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल होने के आरोप हैं। इन खुलासों के बाद तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने गन्ना मिलों, ठेकेदारों, परिवहनकर्ताओं और गन्ना कटाई श्रमिकों के बीच होने वाले वित्तीय लेन-देन को विनियमित करने के लिए अलग कानून लाने की घोषणा की थी। सहकार विभाग इस विधेयक को राज्य के बजट सत्र में पेश करना चाहता था, लेकिन सरकार ने पहले मसौदे की समीक्षा और आवश्यक संशोधन सुझाने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, श्रमिक ठेकेदारों के अनिवार्य पंजीकरण और गन्ना मिलों की अधिक जवाबदेही तय करने जैसे प्रावधानों पर मतभेद उभर आए हैं। कुछ मंत्रियों ने इन प्रावधानों पर आपत्ति जताई है, जिससे समिति की सिफारिशें अंतिम रूप नहीं ले सकी हैं।अधिकारियों ने बताया कि, अब उपसमिति के सदस्यों से लिखित टिप्पणियां मांगी गई हैं। यदि कोई अतिरिक्त प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं होती है, तो समिति अपनी रिपोर्ट राज्य मंत्रिमंडल को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने कहा कि, उपसमिति नियमित रूप से बैठकें कर रही है और सदस्यों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अंतिम रिपोर्ट जल्द ही मंत्रिमंडल के समक्ष रखी जाएगी और प्रस्तावित कानून को आगे बढ़ाया जाएगा।
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