हिमाचल के छोटे से गांव से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर, जस्टिस संजय करोल का CJI सूर्यकांत से है रोचक कनेक्शन
हिमाचल के छोटे से गांव से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर, जस्टिस संजय करोल का CJI सूर्यकांत से है रोचक कनेक्शन सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस संजय करोल सेवानिवृत हो गए. हिमाचल के एक छोटे से गांव गरली से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया…

सौजन्य से:- ETV Bharat
हिमाचल के छोटे से गांव से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर, जस्टिस संजय करोल का CJI सूर्यकांत से है रोचक कनेक्शन
सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस संजय करोल सेवानिवृत हो गए. हिमाचल के एक छोटे से गांव गरली से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 23, 2026 at 3:34 PM IST
शिमला: न्यायमूर्ति...ये शब्द ऐसा है जो विशाल महादेश भारत के वंचित वर्ग की आशाओं के केंद्र में अभी भी है. ऐसे ही एक न्यायमूर्ति हैं संजय करोल. हिमाचल के लाल संजय करोल सुप्रीम कोर्ट में लंबी सेवाओं के बाद शनिवार 22 अगस्त को रिटायर हो गए. उनकी रिटायरमेंट पर सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों की मौजूदगी में भावुक विदाई समारोह हुआ.
यहां जस्टिस संजय करोल के चार दशक के कार्यकाल और उनकी तरल संवेदनाओं का जिक्र करना जरूरी है. ये बयान करना भी जरूरी है कि कैसे हिमाचल के एक छोटे से गांव गरली से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर तय किया गया. इससे पहले कि न्यायमूर्ति संजय करोल की कानूनी यात्रा के सफर पर चलें, यहां उनका देश के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से एक खास संयोग रहा है. ये खास संयोग यूं है कि जब वर्ष 2018 में हिमाचल हाईकोर्ट से तबदील कर जस्टिस करोल को त्रिपुरा का सीजे बनाया गया था तो उस समय जस्टिस सूर्यकांत हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे, और अब जस्टिस संजय करोल सुप्रीम कोर्ट से विदा हुए हैं तो अभी भी जस्टिस सूर्यकांत देश के प्रधान न्यायाधीश हैं. यानी देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत का जस्टिस करोल से किसी न किसी रूप में जुड़ाव रहा है. यही कारण है कि उनके विदाई समारोह में जस्टिस सूर्यकांत भावुक हुए.
तरल संवेदनाओं के वाहक जस्टिस करोल
जस्टिस संजय करोल मानवीय संवेदनाओं की तरलता के वाहक रहे हैं. यहां दो घटनाएं दर्ज की जा रही हैं, जो उनकी पीड़ित मानवता के प्रति संवेदनाओं को दर्शाती हैं. आठ साल पहले सितंबर महीने की बात है. जस्टिस संजय करोल अपने काफिले के साथ हाईकोर्ट जा रहे थे. अचानक उन्हें शिमला में ऑकलैंड टनल के पास लोगों की भीड़ दिखाई दी. जस्टिस संजय करोल अपने वाहन से उतरे तो पाया कि शोघी से दूध बेचने के लिए शिमला आने वाले एक अधेड़ व्यक्ति बेहोश हुआ है. न्यायमूर्ति संजय करोल ने तुरंत अपने वाहन चालक को आदेश जारी किया कि अस्वस्थ व्यक्ति को आईजीएमसी अस्पताल ले जाओ और खुद पैदल ही हाईकोर्ट की तरफ बढ़ चले. दूध बेचकर अपना गुजारा करने वाले व्यक्ति को लेकर जैसे ही जस्टिस करोल की गाड़ी अस्पताल पहुंची, वहां सब सतर्क हो गए. तुरंत व्यक्ति को उपचार मिला और उसकी हालत स्थिर हो गई. उस समय आईजीएमसी अस्पताल के एमएस डॉ. जनकराज थे, जो अब विधायक भी हैं. जस्टिस करोल पैदल हाईकोर्ट जा रहे हैं, ये समाचार पाकर पायलट वाहन मौके पर आया और वो उसमें सवार होकर हाईकोर्ट पहुंचे. घटना बेशक किसी को छोटी लगे, लेकिन एक न्यायमूर्ति की संवेदना यहां झलकती है.
हैरिटेज विलेज के पड़ौसी इलाके से सुप्रीम कोर्ट तक
न्यायमूर्ति संजय करोल का जन्म जिला कांगड़ा के गरली नामक स्थान पर हुआ है. यहीं पास में परागपुर हैरिटेज विलेज के नाम से विख्यात है. स्थानीय लोग बोलचाल की बोली में गरली-परागपुर इकट्ठा कहते हैं. खैर, गरली गांव में 23 अगस्त 1961 को जन्मे संजय करोल की आरंभिक शिक्षा शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल से हुई. उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला से लॉ की डिग्री हासिल की. जस्टिस संजय करोल ने वर्ष 1986 में वकालत शुरू कर दी थी. वो वर्ष 1998 से 2003 तक राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल रहे. बाद में मार्च 2007 को इन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया. जस्टिस संजय करोल 25अप्रैल 2017 से 5 अक्टूबर 2018 तक हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे. बाद में उनका तबादला पटना हाईकोर्ट में हो गया. वे त्रिपुरा हाईकोर्ट के भी चीफ जस्टिस रहे और फिर पटना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला. बाद में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए. सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने तीन साल का कार्यकाल पूरा किया और 22 अगस्त को उनके सम्मान में विदाई समारोह हुआ.
एचपीयू से रहा खास लगाव
जस्टिस संजय करोल ने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में कानून की पढ़ाई की. दिलचस्प तथ्य ये है कि हिमाचल हाईकोर्ट में करीब दस न्यायाधीश ऐसे रहे हैं, जिनकी पढ़ाई हिमाचल यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में हुई है. जस्टिस संजय करोल एक समारोह में एचपीयू में मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे. बात वर्ष 2018 की है और उस समय जस्टिस करोल हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे. जैसे ही जस्टिस करोल मंच पर आए उन्होंने झुककर मंच को प्रणाम किया और कहा कि तीन दशक से यहां मंच पर बोलने के अवसर का इंतजार कर रहा था. उन्होंने एचपीयू में पंडित का ढाबा, यूनिवर्सिटी का तब और 2018 का माहौल और डिपार्टमेंट की सीढ़ियों को लेकर अपनी यादें साझा की.
कुछ चर्चित मामले, जिनमें जस्टिस करोल की रही भूमिका
हिमाचल में अत्यंत पीड़ादायक गुड़िया केस में जस्टिस संजय करोल ने समय-समय पर जांच एजेंसी सीबीआई पर सख्ती दिखाई थी. वन भूमि पर अतिक्रमण मामलों में भी उन्होंने कई सख्त फैसले दिए। हिमाचल के चर्चित मीर बख्श केस में भी जस्टिस संजय करोल ने सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए फैसले जारी किए. पटना हाईकोर्ट में सीजे के रूप में सेवारत रहते हुए जस्टिस करोल ने कोविड महामारी के भयावह दौर में आम जनता के लिए कई फैसले दिए और राज्य सरकार को सतर्क किया. इसी प्रकार शिमला में जलसंकट के दौरान जस्टिस संजय करोल खुद सड़कों पर उतर गए थे और प्रशासन को चौकन्ना होना पड़ा था. ये उनका शिमला शहर के प्रति प्रेम भी कहा जाएगा, क्योंकि उस समय जलसकंट के कारण शिमला की छवि वैश्विक स्तर पर खराब हो रही थी. वे 2018 में जुलाई महीने में रात 11 बजे से सुबह तीन बजे तक खुद सड़कों पर रहकर पेयजल सप्लाई को लेकर प्रशासन को दिशा-निर्देश देते रहे थे.
हिमाचल के वरिष्ठ मीडिया कर्मी डॉ. संजीव कुमार शर्मा जस्टिस संजय करोल के साथ अपने जुड़ाव और उनके स्नेह को लेकर लिखते हैं-जस्टिस संजय करोल का मुझ पर विशेष स्नेह रहा है. उनकी दयालुता के हजारों किस्से हैं और उन्हें लिखने लगूं तो एक किताब बन जाए. डॉ. संजीव शर्मा ने जस्टिस संजय करोल का कुल्लू दशहरे के प्रति जुड़ाव का भी जिक्र अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में किया है.
गरली के रहने वाले प्रभुदत्त शास्त्री का कहना है कि जस्टिस संजय करोल का अपने पैतृक इलाके से बहुत लगाव है. वो यहां अकसर आते हैं और सभी की समस्याओं को सुनते हैं. गरली में वो अपनी माता स्वर्गीय निर्मला देवी और पिता स्व. रामानंद सूद की स्मृति में आयोजन करते हैं और सभी सामान्य जनों से मिलते हैं.
शिमला शहर के कारोबारी वीरेंद्र सिंह ऋषि कहते हैं कि जस्टिस संजय करोल कई मर्तबा सैर के लिए निकलते थे और माल रोड के कारोबारी उनका अभिवादन करने के लिए खड़े होते थे तो वे सभी से विनम्रता से मिलते थे. वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें जस्टिस संजय करोल को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत होने पर कुछ लोग सम्मानित करने पहुंचे हैं और वे सारे प्रोटोकॉल को भूलकर कह रहे हैं-सर, आपको शायद मालूम नहीं होगा कि हम आपको आदर से चाचाजी भी कहते हैं. ये सुनते ही जस्टिस करोल ठहाका लगाकर हंसते हैं और कहते हैं कि आप ही नहीं, सभी कहते हैं. यही जस्टिस करोल का अंदाज है.
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