दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: टीवी पर एक घंटे में 12 मिनट से अधिक विज्ञापन नहीं, ट्राई के नियम बरकरार
दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के नियम को बरकरार रखा, जिसमें टीवी चैनलों को प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन प्रसारित करने की अनुमति दी गई है। अदालत ने चैनलों की याचिकाएं खारिज कर दीं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a5015d5f09690ea0e05baf4","slug":"no-more-than-12-minutes-of-advertisements-per-hour-on-tv-high-court-upholds-trai-rule-2026-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi High Court: टीवी पर एक घंटे में 12 मिनट से अधिक विज्ञापन नहीं, अदालत ने ट्राई के नियम को बरकरार रखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi High Court: टीवी पर एक घंटे में 12 मिनट से अधिक विज्ञापन नहीं, अदालत ने ट्राई के नियम को बरकरार रखा
Fri, 10 Jul 2026 03:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 10 Jul 2026 03:13 AM IST
सार
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि विज्ञापनों की अवधि तय करना ट्राई के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह व्यवस्था दर्शकों को बेहतर देखने का अनुभव प्रदान करने और लंबे-लंबे विज्ञापन ब्रेक से राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के उस नियम को वैध ठहराया है, जिसमें टीवी चैनलों को प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन प्रसारित करने की अनुमति दी गई है। अदालत ने चैनलों और प्रसारण उद्योग संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
विज्ञापन
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि विज्ञापनों की अवधि तय करना ट्राई के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह व्यवस्था दर्शकों को बेहतर देखने का अनुभव प्रदान करने और लंबे-लंबे विज्ञापन ब्रेक से राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
विज्ञापन
चैनलों का तर्क था कि प्रति घंटे सख्त सीमा से उनकी कार्यक्रम योजना और विज्ञापन स्लॉट का प्रबंधन प्रभावित होता है। समाचार चैनलों ने यह भी कहा कि सदस्यता आय सीमित होने के कारण विज्ञापन उनके लिए मुख्य आय का स्रोत हैं और यह नियम उनके सांविधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 19(1)(अ)) का उल्लंघन करता है।
विज्ञापन
हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सभी प्रकार के टीवी चैनलों पर समान नियम लागू करना भेदभाव नहीं है। यह नियम केवल विज्ञापनों के प्रसारण के तरीके को नियंत्रित करता है, कार्यक्रम या समाचार की सामग्री पर कोई रोक नहीं लगाता।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां
- प्रति घंटे 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापन और 2 मिनट सेल्फ-प्रोमोशनल कंटेंट की कुल सीमा रहेगी।
- विज्ञापनों को पूरे घंटे में संतुलित ढंग से प्रसारित करने की व्यवस्था दर्शकों के हित में है।
- टीवी माध्यम प्रिंट मीडिया से अलग है, क्योंकि दर्शक प्रसारण के दौरान विज्ञापनों को आसानी से स्किप नहीं कर सकते।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय सभा के विशेषज्ञ प्रतिनिधि करेंगे 17 मसौदा कानूनों पर विस्तृत चर्चा
- कर्नाटक व पश्चिम बंगाल में चुनावी रोल से हटाए गए लाखों मतदाता: समीक्षा प्रक्रिया में देरी और अपील लंबित
- चुनाव आयोग में आंतरिक असहमति और नियुक्ति नियमों पर संवैधानिक चुनौती
- जब रेफ़री भी गलती करे: चुनाव आयोग विवाद को समझाया 7 मुख्य प्रश्नों में
- सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफ युद्ध विधवा को पुनः सेवा में लौटाया
- बैंकिंग क्षेत्र के तीन नए कानूनों के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत योजना जारी
- प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम कानून के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय योजना जारी की
- सुप्रीम कोर्ट ने ऑबसी क्रिमी लेयर निर्णय के भविष्य के प्रयोग पर जजमेंट रोक रखा

