केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को ‘कम चल रहा प्रयोग’ बताए जाने की खबरों का किया खंडन
केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को 'कम चल रहा प्रयोग' बताया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि इससे विरोधाभासी फैसले आने से बचने के लिए एक साथ सुनवाई की जा रही है।

सौजन्य से:- ChiniMandi
नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) कार्यक्रम को “चल रहा प्रयोग” (ओनगोइंग एक्सपेरिमेंट) बताया है। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया। मंत्रालय के अनुसार, भारत के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने 30 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की एथेनॉल आवंटन से जुड़ी विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टों में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
कुछ समाचारों में दावा किया गया था कि, अटॉर्नी जनरल ने अदालत से कहा है कि सरकार का 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) कार्यक्रम अभी भी एक “चल रहा प्रयोग” है और इसके प्रभाव का वास्तविक आकलन अगले वर्ष ही हो सकेगा। हालांकि, सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि अदालत में ऐसी कोई बात नहीं कही गई।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट्स को एथेनॉल आवंटन से जुड़े समान कानूनी प्रश्नों वाली कई रिट याचिकाएं देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। इन सभी मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के उद्देश्य से ट्रांसफर याचिकाएं दायर की जा रही हैं, ताकि समान अनुबंधीय ढांचे से जुड़े कानूनी प्रश्नों पर एकसमान निर्णय हो सके और अलग-अलग अदालतों से विरोधाभासी फैसले आने की स्थिति से बचा जा सके।
अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि, इन मामलों को एक साथ सुनने से यह सुनिश्चित होगा कि राष्ट्रीय एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को पूरे वर्ष 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लिए आवश्यक आपूर्ति प्रभावित न हो।सरकार के इन तर्कों पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रस्तावित ट्रांसफर याचिकाएं दायर की जाएं। साथ ही अदालत ने संबंधित मामले में वर्तमान एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2025-26) के लिए एथेनॉल आवंटन की मौजूदा स्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने का निर्देश दिया।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने स्पष्ट किया कि सरकार ने किसी भी समय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम या E20 पहल को “प्रयोग” नहीं बताया। सरकार ने दोहराया कि इस तरह के सभी दावे पूरी तरह गलत हैं और वे भारत सरकार की ओर से अदालत में दिए गए वास्तविक पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
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