सुप्रीम कोर्ट में E20 पेट्रोल पर सुनवाई: याचिका में मांगें लेबलिंग, डेटाबेस और ट्रांज़िशन प्लान
नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर याचिका में पेट्रोल नोज़ल पर इथेनॉल प्रतिशत का स्पष्ट लेबल, बिल पर जानकारी और सार्वजनिक व्हीकल-कोम्पैटिबिलिटी डेटाबेस लगाने की मांग है। साथ ही स्वतंत्र समिति के गठन, पर्यावरणीय प्रभाव की समीक्षा और पुराने वाहनों के लिए पारदर्शी ट्रांज़िशन फ्रेमवर्क की भी माँग की गई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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क्या है याचिका में मांग?
नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि पेट्रोल पंप के हर डिस्पेंसिंग नोजल पर साफ और आसानी से दिखाई देने वाला लेबल लगाया जाए। इसमें यह बताया जाए कि बेचे जा रहे पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला हुआ है।याचिका में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को दिए जाने वाले हर फ्यूल बिल पर भी इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाए, ताकि उपभोक्ता को पेट्रोल खरीदते समय इसकी पूरी जानकारी मिल सके।
कौन सा इथेनॉल ब्लेंड सही?
याचिका में केंद्र से एक आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से सर्च की जा सकने वाली व्हीकल-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है। इसमें वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध हो कि कौन सी गाड़ी किस इथेनॉल ब्लेंड के लिए उपयुक्त है। इससे वाहन मालिकों को यह समझने में मदद मिल सकेगी कि उनकी गाड़ी E20 या दूसरे इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ कितनी अनुकूल है।E20 पेट्रोल के लिए कमेटी की मांग
- याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है।
- इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
- यह समिति देश में मौजूद अलग-अलग वाहनों पर E20 पेट्रोल की वास्तविक स्थिति और उसके असर की जांच कर सार्वजनिक रिपोर्ट दे।
- रिपोर्ट में ईंधन की माइलेज, इंजन की उम्र, मेंटेनेंस खर्च, वाहन की वारंटी और इंश्योरेंस पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जानकारी देने की मांग की गई है।
पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
याचिका में इथेनॉल ब्लेंडिंग के पर्यावरणीय प्रभाव की भी समीक्षा की मांग की गई है। इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, इथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शामिल करने की बात कही गई है।इसके अलावा, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों के ईंधन उत्पादन की ओर जाने से पशु चारे की उपलब्धता पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी अध्ययन करने की मांग की गई है।
डॉक्यूमेंट सार्वजनिक करने की मांग
याचिका में कहा गया है कि E20 ईंधन के अनिवार्य रोल-आउट का समर्थन करने वाली सभी नीतिगत फाइलों, तकनीकी अध्ययनों, सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक परामर्श के रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाए।पुराने वाहनों के लिए भी ट्रांजिशन प्लान की मांग
याचिका में पुराने और E20 के साथ अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए एक समयबद्ध और पारदर्शी ट्रांजिशन फ्रेमवर्क बनाने की मांग की गई है।इसमें जहां तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से संभव हो, वहां कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर भी विचार करने की बात कही गई है। इसके लिए विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श के आधार पर फैसला लेने की मांग की गई है।
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