हिमाचल प्रदेश HC ने गृहिणी के काम की कीमत बढ़ाकर दिया बड़ा मुआवजा
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गृहिणी के काम की कीमत बढ़ाकर उनके बेटों को 30 लाख 47 हजार रुपये का मुआवजा दिया।

सौजन्य से:- Jagran
गृहिणी के काम की कीमत नहीं आंकी जा सकती, हिमाचल प्रदेश HC ने मुआवजा पांच गुना बढ़ाया
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मृत गृहिणी के बेटों के लिए मुआवजा राशि पांच गुना से अधिक बढ़ा दी है। कोर्ट ने कहा कि गृहिणी के बहुआयामी क ...और पढ़ें
HighLights
- गृहिणी के काम को आर्थिक पैमाने पर नहीं तौला जा सकता।
- हाई कोर्ट ने मुआवजा राशि 5.58 लाख से 30.47 लाख की।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर बढ़ा मुआवजा।
विधि संवाददाता, शिमलाl शिमला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि एक गृहिणी और मां के बहुआयामी कार्यों को सिर्फ सीमित आर्थिक पैमाने पर नहीं तौला जा सकता, वे अदृश्य रहकर भी देश के लिए मानव मूल्य तैयार करने की नींव रखती हैं।
इसी सिद्धांत के आधार पर कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए सड़क दुर्घटना में मारी गई महिला के बेटों के लिए मुआवजा राशि पांच गुना से ज्यादा बढ़ा दी।
यह निर्णय न्यायाधीश विरेंदर सिंह ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की याचिका का निपटारा करते हुए दिया। 20 मई, 2013 को जीटी रोड पर एक वाहन की टक्कर से 55 वर्षीय सरिता देवी की मौत हो गई थी। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल कांगड़ा ने छह मार्च, 2018 को महिला के दो बेटों के पक्ष में 5,58,000 का मुआवजा मंजूर किया था।
बीमा कंपनी ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी थी कि महिला के दोनों बेटे बालिग, शादीशुदा व निजी नौकरियों में हैं, अतः वे मां पर आश्रित नहीं माने जा सकते। उन्हें आजीविका के नुकसान का मुआवजा नहीं मिलना चाहिए।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए बीमा कंपनी की दलील खारिज कर दी। कहा, बालिग व कमाऊ बेटे भी कानूनी प्रतिनिधि होने के नाते उचित मुआवजे के हकदार हैं।
महिला का काल्पनिक योगदान 6 प्रति माह आंका
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया कानूनी रुख के आधार पर मुआवजे की गणना में बदलाव किए। ट्रिब्यूनल ने महिला का काल्पनिक योगदान केवल 6 प्रति माह आंका था। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर के अनुसार इसे बढ़ाकर 30,000 प्रति माह तय किया।
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महिला की आयु 55 वर्ष होने के कारण नियमानुसार स्थापित आय में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी शामिल की गई, जिससे कुल मासिक आय 33,000 हो गई। हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए कुल मुआवजे को 5,58000 से बढ़ाकर 30,47,000 करने का आदेश जारी किया।
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