हाई कोर्ट लखनऊ ने कहा: कब्जा मिलने के बाद भी खरीदार को बिल्डर से देरी का ब्याज मिल सकता है
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रेरा के तहत यह स्पष्ट किया कि फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी बिल्डर की देरी पर ब्याज का अधिकार खरीदार के पास रहता है और इसके लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। कोर्ट ने नोएडा के अंतरिक्ष गोल्फ व्यू प्रोजेक्ट में बिल्डर के एनजीटी रोक के तर्क को खारिज कर दिया, यह कहा कि देरी पहले ही हुई थी।

सौजन्य से:- Jagran
हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ का फैसला, फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी बिल्डर से देरी का ब्याज मांग सकता है खरीदार
Allahabad High Court Lucknow Bench: खरीदार किसी भी परियोजना में बने रहने की स्थिति में भी वह कब्जा मिलने तक प्रत्येक माह की देरी के लिए ब्याज का हकदार है।
HighLights
- रेरा के तहत देरी के लिए ब्याज का दावा करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं
- नोएडा के अंतरिक्ष गोल्फ व्यू परियोजना से जुड़े प्रकरण पर हाई कोर्ट का निर्देश
- एनजीटी की रोक का लाभ भी तभी जब उससे परियोजना वास्तव में प्रभावित हुई हो
विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने फ्लैट के खरीददार के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बिल्डर के फ्लैट का कब्जा दे देने के बाद भी खरीदार को कब्जा देने में हुई देरी के लिए ब्याज मांगने का वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होता।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने यह आदेश नोएडा स्थित अंतरिक्ष गोल्फ व्यू परियोजना से जुड़े रेरा अपील मामले में अंतरिक्ष डेवलपर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि रेरा के तहत देरी के लिए ब्याज का दावा करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं है। खरीदार किसी भी परियोजना में बने रहने की स्थिति में भी वह कब्जा मिलने तक प्रत्येक माह की देरी के लिए ब्याज का हकदार है।
कोर्ट में दाखिल याचिका में खरीदार श्याम सुंदर अग्रवाल ने वर्ष 2010 में सेक्टर-78, नोएडा की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। समझौते के अनुसार नवंबर 2012 तक कब्जा दिया जाना था। बिल्डर ने मई 2017 में कब्जे की पेशकश की, वह भी बिना अधिभोग प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेजों के। रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण ने खरीदार को दिसंबर 2012 से मई 2017 तक जमा राशि पर एमसीएलआर से एक प्रतिशत अधिक की दर से विलंब ब्याज देने का निर्देश दिया था।
इसके बाद बिल्डर ने हाई कोर्ट में दलील दी कि परियोजना में देरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के कारण हुई। उसका कहना था कि ओखला पक्षी विहार के आसपास 10 किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण और अधिभोग प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक थी। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि बिल्डर के अपने ही पक्ष के अनुसार परियोजना वर्ष 2014 में पूरी हो गई थी और उसी वर्ष अधिभोग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन भी किया गया था। ऐसे में वह एक ओर परियोजना पूरी होने की बात और दूसरी ओर एनजीटी की रोक के कारण परियोजना पूरी न होने की दलील एक साथ नहीं दे सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एनजीटी की रोक अगस्त 2013 में लगी, जबकि कब्जा देने की संविदात्मक समय सीमा नवंबर 2012 थी। यानी बिल्डर की चूक रोक लगने से पहले ही हो चुकी थी। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से मान्य जीरो पीरियड का लाभ भी उस अवधि तक ही सीमित रहेगा और इससे पहले हुई देरी समाप्त नहीं हो सकती।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को विवादास्पद नागरिकता डेटाबेस के उपयोग की स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत
- कानून का सही उपयोग: बहादुरपुर में एससी-एसटी अधिनियम पर बैठक
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की, आदेश से नहीं थोप सकते भाषा
- एपी हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी मानने के बाद तीन‑राजधानी प्रस्ताव को निरर्थक घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं रोका SIR?
- महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह की बरी को चुनौती, दिल्ली कोर्ट में दायर की अपील
- ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश

