पति का पैर कटा तो पत्नी ने मांग लिया तलाक, हिमाचल का मामला, अदालत बोली- विपदा में साथी को छोड़ना आधार नहीं - himachal court rejects divorce plea after husbands amputation
पति का पैर कटा तो पत्नी ने मांग लिया तलाक, हिमाचल का मामला, अदालत बोली- विपदा में साथी को छोड़ना आधार नहीं पति का पैर कटने के बाद तलाक मांगने वाली पत्नी की याचिका को सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा क…

सौजन्य से:- Jagran
पति का पैर कटा तो पत्नी ने मांग लिया तलाक, हिमाचल का मामला, अदालत बोली- विपदा में साथी को छोड़ना आधार नहीं
पति का पैर कटने के बाद तलाक मांगने वाली पत्नी की याचिका को सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि विपदा में जीवनसाथी को छोड़ना तलाक का आधार नहीं हो सकता।
HighLights
- पति का पैर कटने पर पत्नी ने मांगा तलाक।
- सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने तलाक याचिका खारिज की।
- विपदा में जीवनसाथी को छोड़ना तलाक का आधार नहीं।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश में एक बेहद मार्मिक मामला सामना आया है। पति का पैर कट गया तो पत्नी ने उसके बाद तलाक मांग लिया। मामला न्यायालय में पहुंचा तो अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुंदरनगर की अदालत ने विवाह और सामाजिक दायित्वों से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने गंभीर बीमारी के कारण अपना एक पैर गंवा चुके पति से तलाक की मांग करने वाली पत्नी की याचिका को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि याचिकाकर्ता पर लागत भी लगाई।
अदालत ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों और शारीरिक असमर्थता के समय अपने जीवनसाथी को सहारा देने के बजाय उसे बोझ मानकर पीछा छुड़ाना हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार नहीं बन सकता।
क्रूरता करने का आरोप
मामला सुंदरनगर के बीबीएमबी क्वार्टर में रहने वाली मीना कुमारी और उनके पति पारगी निवासी ललित कुमार का है। याचिकाकर्ता पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (आइए) व (आइबी) के तहत पति पर मानसिक व शारीरिक क्रूरता करने तथा वर्ष 2014 से उसे परित्यक्त करने का आरोप लगाते हुए तलाक की गुहार लगाई थी।
जिरह में उजागर हुई दावों की सच्चाई
अदालत में हुई सुनवाई और जिरह के दौरान याचिकाकर्ता के दावों की पोल खुल गई। पत्नी ने स्वीकार किया कि वह और उसका पति वर्ष 2014 से 2023 तक सुंदरनगर के जवाहर पार्क स्थित एक किराये के मकान में साथ रह रहे थे। ऐसे में 2014 से पति द्वारा छोड़े जाने (परित्याग) का आरोप पूरी तरह से झूठा और बनावटी साबित हुआ। इसके अलावा, प्रतिवादी पति ललित कुमार की गंभीर बीमारी के कारण एक टांग काटनी पड़ी थी और वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। पत्नी ने कोर्ट में स्वीकार किया कि पति का पैर कटने के बाद वह उनसे मिलने तक नहीं गई।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता पत्नी अपने पति पर क्रूरता या परित्याग के आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रही है। कोर्ट ने कहा कि जब पति को पत्नी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब उसने अपना नैतिक व कानूनी कर्तव्य निभाने के बजाय झूठे आधार तैयार कर तलाक लेने की कोशिश की। अदालत ने इस याचिका को पोषणीय न मानते हुए सव्यय निरस्त कर दिया।
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