'तबादला आदेश के उल्लंघन पर नौकरी से बर्खास्तगी बहुत सख्त सजा', हिमाचल हाई कोर्ट ने बदला एकलपीठ का फैसला - himachal high court dismissal for transfer delay overturned
'तबादला आदेश के उल्लंघन पर नौकरी से बर्खास्तगी बहुत सख्त सजा', हिमाचल हाई कोर्ट ने बदला एकलपीठ का फैसला हिमाचल हाई कोर्ट ने तबादला आदेश को चुनौती देने और देरी से ज्वाइन करने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी को बहुत सख्त सजा बता…

सौजन्य से:- Jagran
'तबादला आदेश के उल्लंघन पर नौकरी से बर्खास्तगी बहुत सख्त सजा', हिमाचल हाई कोर्ट ने बदला एकलपीठ का फैसला
हिमाचल हाई कोर्ट ने तबादला आदेश को चुनौती देने और देरी से ज्वाइन करने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी को बहुत सख्त सजा बताया है।
HighLights
- तबादला आदेश उल्लंघन पर बर्खास्तगी को कोर्ट ने सख्त सजा माना।
- 19 साल की सेवा और पारिवारिक स्थिति पर कोर्ट ने विचार किया।
- बर्खास्तगी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदलने का निर्देश दिया।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल तबादला आदेश को चुनौती देने और विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नए स्टेशन पर देरी से ज्वाइन करने के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करना कानूनन बहुत सख्त और चौंकाने वाली सजा है। कोर्ट ने कर्मचारी की 19 साल से अधिक की लंबी सेवा और उसके घर की स्थिति को देखते हुए सेवामुक्ति के आदेश को पलट दिया और उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदलने के निर्देश दिए हैं ताकि उसके परिवार को पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ मिल सकें।
2024 के फैसले को किया निरस्त
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने कर्मचारी रक्षपाल द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने इस संबंध में एकलपीठ द्वारा वर्ष 2024 में दिए उस फैसले को भी निरस्त कर दिया, जिसने विभाग की बर्खास्तगी की कार्रवाई को सही ठहराया था।
देहरा से काजा किया था तबादला
अपीलकर्ता रक्षपाल कृषि विभाग में सब्जेक्ट मैटर स्पेशलिस्ट के पद पर तैनात थे। 30 अगस्त 2018 को विभाग ने उनका तबादला विकास खंड देहरा (कांगड़ा) से काजा (लाहुल स्पीति) कर दिया। कर्मचारी ने इस तबादले को पहले स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, फिर हाई कोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
4 महीने तक नहीं दी थी ज्वाइनिंग
इस कानूनी प्रक्रिया के चलते उन्होंने सात फरवरी 2019 को काजा में ज्वाइनिंग दी थी, यानी वे करीब चार महीने से अधिक समय तक स्टेशन से अनुपस्थित रहे। विभाग ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विभागीय जांच बिठाई और एक नवंबर 2019 को उन्हें बर्खास्त कर दिया।
बताए थे पारिवारिक कारण
प्रार्थी ने बीमार मां, कामकाजी पत्नी और कैंसर पीड़ित बच्चे का हवाला देते हुए बताया कि काजा न जाने के पीछे गंभीर और मजबूरी भरे पारिवारिक कारण थे।
यह वित्तीय फ्रॉड या नैतिक पतन का मामला नहीं
कोर्ट ने कहा, तबादला आदेश की कानूनी लड़ाई लड़ना और देरी से ज्वाइन करना कोई ऐसा वित्तीय फ्राड या घोर नैतिक पतन का मामला नहीं है, जिसके लिए कर्मचारी को 19 साल के सेवा रिकार्ड और वित्तीय सेवानिवृत्ति लाभ से वंचित कर दिया जाए। अनुशासन बनाए रखने के लिए विभाग के पास वेतनवृद्धि रोकना या वेतनमान कम करने जैसे कई अन्य विकल्प मौजूद थे, लेकिन अपीलीय प्राधिकारी ने उन पर विचार नहीं किया।
कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर विभाग के बर्खास्तगी आदेश को संशोधित कर कर्मचारी को बर्खास्तगी की तिथि से ही अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त मानने के आदेश दिए। राज्य सरकार और कृषि विभाग को निर्देश दिए कि कर्मचारी को मिलने वाले सभी परिणामी लाभ आठ सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं।
यह भी पढ़ें: नकल मामले में निलंबित शिक्षकों को हिमाचल हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 91वें दिन समीक्षा करने पर निलंबन आदेश रद
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