ITR का महत्व, ITR क्या है? | सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करने की प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, ITR को अहम दस्तावेज माना गया है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार अन्य वित्तीय साक्ष्यों पर भी विचार किया जा सकता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
नई दिल्ली: मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नई बात कही है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करने में आयकर रिटर्न यानी ITR को महत्वपूर्ण आधार मानने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। फैसले का उद्देश्य देशभर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण MACT और अदालतों में मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया में एकरूपता लाना है। हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया ITR ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार अन्य वित्तीय साक्ष्यों पर भी विचार किया जा सकता है।
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मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
- सुप्रीम कोर्ट के पास यह जानकारी थी कि देश के विभिन्न मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण और उच्च न्यायालयों में मुआवजा तय करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाये जा रहे हैं।
- कहीं केवल अंतिम आयकर रिटर्न को आधार बनाया जा रहा था तो कहीं कई वर्षों की आय का औसत निकाला जा रहा था। इस असमानता के कारण समान परिस्थितियों वाले मामलों में भी अलग-अलग मुआवजा निर्धारित हो रहा था।
- सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण व्यवसायी रश्मिरेखा त्रिपाठी के परिवार द्वारा श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए इस बारे में अगम दिशा निर्देश दिए ताकि ऐसे मामलों में एकरुपता बने।
- न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति न्यायिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। और पूरे देश में एक समान मानक अपनाने की आवश्यकता बताई।
- न्यायालय ने साफ दिशा-निर्देश जारी कर कहा कि ऐसे मामलों में ITR को अहमियत दी जाए। यह एक वैधानिक दस्तावेज है और आय निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले के तथ्यों के अनुसार लचीलापन बनाए रखना आवश्यक होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने वेतनभोगी और स्वरोजगार वालों के बारे में कहा कि दोनों वर्गों की आय की प्रकृति अलग होती है। वेतनभोगी कर्मचारियों की आय अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, इसलिए उनके मामले में दुर्घटना से ठीक पहले वाले वर्ष का ITR पर्याप्त माना जाएगा।
- व्यापारियों और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों की आय में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। इसलिए उनके लिए पिछले तीन वर्षों तक के ITR की औसत आय को आधार बनाया जाएगा।
ITR के अलावा अन्य साक्ष्य भी देखे सकते हैं
फैसले के अनुसार ITR सबसे अहम दस्तावेज है, लेकिन यह हर मामले में अंतिम और एकमात्र आधार नहीं होगा। यदि किसी व्यक्ति की आय असाधारण परिस्थितियों के कारण अचानक बढ़ी या घटी हो, तो न्यायाधिकरण अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण करेगा। ऐसे मामलों में बैंक स्टेटमेंट, वित्तीय रिकॉर्ड, व्यापार का स्वरूप, विकास की संभावना और अन्य संबंधित दस्तावेजों पर विचार किया जा सकता है। यदि ITR उपलब्ध नहीं है, तो अदालत वैकल्पिक वित्तीय साक्ष्यों का उपयोग कर सकती है, लेकिन उसके लिए कारण दर्ज करना आवश्यक होगा।सावधान, Spinny और Cars24 जैसी कंपनियों को कार बेचना पड़ सकता है भारी, RC ट्रांसफर में लापरवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछे अहम सवाल
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