जोसेफ विजय सरकार बोलीं- गोवध पर पाबंदी के आदेश को खारिज होना चाहती हैं
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।

सौजन्य से:- Jansatta
तमिलनाडु की जोसेफ विजय सरकार ने राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूरी तरह रोक लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
तमिलनाडु सरकार ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट के 27 मई के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि राज्य में 28 मई को बकरीद की पूर्व संध्या पर या किसी भी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध न किया जाए।
हाई कोर्ट का यह आदेश 1976 के उस आदेश पर आधारित था, जिसमें दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के हित में गोवध पर रोक लगाई गई थी। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है।
के. सूर्य प्रशांत ने दायर की थी याचिका
अधिनियम के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर 10 वर्ष से अधिक आयु की ऐसी गायों के वध की अनुमति है जो काम करने और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हों। हाई कोर्ट ने हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रशांत की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया था।
याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि पशुओं का वध केवल निर्धारित स्थानों पर किया जाए। हाई कोर्ट ने हालांकि तमिलनाडु में किसी भी दिन और कहीं भी गायों और बछड़ों का वध किए जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
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