सीजीएल नियुक्ति पर तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अप्वाइंटमेंट लेटर जांच के नतीजे के अधीन, नियुक्ति पत्रों में करना होगा जिक्र - jharkhand cgl appointments sc mandates criminal case disclosure
सीजीएल नियुक्ति पर तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अप्वाइंटमेंट लेटर जांच के नतीजे के अधीन, नियुक्ति पत्रों में करना होगा जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सीजीएल नियुक्तियों पर शर्त लगाई है कि ये जांच के अंतिम परिणाम के अधीन हो…

सौजन्य से:- Jagran
सीजीएल नियुक्ति पर तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अप्वाइंटमेंट लेटर जांच के नतीजे के अधीन, नियुक्ति पत्रों में करना होगा जिक्र
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सीजीएल नियुक्तियों पर शर्त लगाई है कि ये जांच के अंतिम परिणाम के अधीन होंगी। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नियुक्ति पत्रों में इस शर्त का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने सीजीएल नियुक्तियों पर लगाई शर्त।
- नियुक्तियां जांच के अंतिम परिणाम के अधीन होंगी।
- नियुक्ति पत्रों में शर्त का उल्लेख करना अनिवार्य।
मनोज सिंह, रांची। सुप्रीम कोर्ट ने सीजीएल नियुक्ति मामले में झारखंड हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए कुछ शर्त लगाई थी। अदालत ने कहा था कि इस मामले में हो रही जांच के अंतिम निर्णय से नियुक्तियां प्रभावित होगी और इसका पूरा उल्लेख नियुक्ति पत्रों पर किया जाए।
संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार ने इस पर अमल करते हुए सीजीएल नियुक्ति परीक्षा को रद करने का भी निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता प्रकाश कुमार एवं अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा था कि वे हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।
हालांकि, पीठ ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया कि अब तक जारी किए गए तथा भविष्य में जारी होने वाले सभी नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) संबंधित सभी आपराधिक अभियोजनों के अंतिम परिणाम के अधीन होंगे। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह नियुक्ति पत्रों में इस आशय का स्पष्ट उल्लेख करना सुनिश्चित करे।
जानें पूरा मामला
झारखंड हाई द्वारा तीन दिसंबर 2025 को पारित आदेश (डब्ल्यूपीएस संख्या 1476/2025 और डब्ल्यूपीपीआईएल संख्या 5717/2024) के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कुछ नियुक्तियों या भर्ती प्रक्रिया से संबंधित मामले पर निर्णय दिया गया था।
हाई कोर्ट ने सीजीएल परीक्षा के परिणाम जारी करने और सरकार को नियुक्ति करने का आदेश दिया था। हालांकि हाई कोर्ट ने एसआइटी की जांच छह माह में पूरी करने को भी कहा था।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
अपील को खारिज करते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति पत्रों की वैधता अंततः आपराधिक मामलों के नतीजे पर निर्भर करेगी। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चल रहा है और बाद में उसमें दोष सिद्धि होती है, तो उसकी नियुक्ति रद या प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि नियुक्ति पत्रों में यह शर्त स्पष्ट रूप से अंकित की जाए।
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