मोबाइल फोन में जुआ खेलने का खतरा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तकनीकी विकास ने हर मोबाइल फोन को वर्चुअल जुआघर में बदल दिया है, ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के प्रचलन को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया। सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और जुए पर प्रतिबंध लगाने के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार के कानून को सही ठहराया।

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
हर मोबाइल वर्चुअल बन गया है जुआघर : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तकनीकी विकास ने हर मोबाइल फोन को 'वर्चुअल जुआघर' में तब्दील कर दिया है। उन्होंने ऑनलाइन सट्टेबाजी और बड़े पैमाने पर जुए के प्रचलन को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि तकनीकी विकास ने हर मोबाइल फोन को ‘वर्चुअल जुआघर’ में तब्दील कर दिया है। शीर्ष अदालत ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और बड़े पैमाने पर जुए के प्रचलन को सार्वजनिक व्यवस्था, सार्वजनिक शांति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए यह टिप्पणी की।
जुआ खेलने वाले तक परिणाम सीमित नहीं
शीर्ष अदालत ने कहा कि 69 पन्नों के फैसले में कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के नतीजे सिर्फ इसमें शामिल लोगों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।
डिजिटल क्रांति ने जुए के तरीके को बदला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तकनीकी विकास के साथ आए डिजिटल क्रांति ने ‘जुआ’ के तरीके को पूरी तरह बदल दिया।
पीठ ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था न सिर्फ हिंसा या अव्यवस्था से बिगड़ती है, बल्कि उन गतिविधियों से भी बिगड़ती है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़े पैमाने पर डर या दहशत पैदा करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और जुए पर प्रतिबंध लगाने के लिए कर्नाटक और तमिलनाडु सरकार के कानून को सही ठहराते हुए यह फैसला दिया।
पीठ ने कहा कि दोनों राज्य सरकारों द्वारा बनाए कानून सही हैं जो ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए पर प्रतिबंध लगाते हैं, भले ही वे कौशल वाले खेल ही क्यों न हों।
पीठ ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से जुड़े सामाजिक नुकसानों का सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ पर्याप्त संबंध है।
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