सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेगा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़, भू स्वामी पहले से मिलने वाला पैसा शामिल होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में जमीन अधिग्रहण के मामले में एक बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने किसानों को 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिलाने का आदेश दिया है, जिसमें भू स्वामी पहले से मिलने वाला पैसा भी शामिल होगा। यह फैसला Land Acquisition Act, 1894 की धारा 28-A के तहत दिया गया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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क्या था सरकार के भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का विवाद
- यह मामला, कर्नाटक राज्य में 11 फरवरी, 1999 की अधिसूचना से जुड़ा है। जिसके बाद कर्नाटक के बागलकोट जिले में भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
- भूमि अधिग्रहण अधिकारी के अवार्ड के बाद संदर्भ न्यायालय ने 2001 में मुआवजा तीन लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था। तब असंतुष्ट किसानों ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
- हालांकि भूमि अधिग्रहण अथॉरिटी और राज्य सरकार ने दलील दी कि किसानों ने अपील दाखिल करने में अत्यधिक देरी की थी। हाई कोर्ट ने इस देरी को असामान्य माना था। आखिर में हाई कोर्ट ने इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया था।
- किसानों ने इस फैसले से भी असंतोष जाहिर किया और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उन्होंने उसी अधिसूचना से अधिग्रहित जमीन पर पहले 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिए जाने का हवाला देते हुए उसी के समान मुआवजे की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हक में क्या फैसला दिया?
- सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ के सामने आया। जिसकी सुनवाई में अदालत ने तथ्यों और Land Acquisition Act, 1894 की धाराओं पर विशेष ध्यान दिया
- अदालत ने इस बात पर गौर किया कि संबंधित अधिसूचना के मामलों में वैधानिक लाभों सहित मुआवजा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया जा चुका है। इस स्थिति में मुआवजे की उक्त दर अपीलकर्ता किसानों पर भी लागू होनी चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समान स्थिति वाले भू-स्वामियों के बीच मुआवजे में समानता बनाए रखना Section 28-A का मूल उद्देश्य है। इसकी व्याख्या करते हुए अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से बाद में बढ़ा हुआ मुआवजा मिलने पर समान स्थिति वाले अन्य भूमि मालिक भी उसका लाभ मांग सकते हैं।
- इसी बिंदु को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सात अगस्त को किसानों की ओर से अपील में अत्यधिक देरी किए जाने के बावजूद संविधान में मिली अनुच्छेद-142 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए अपीलकर्ताओं की मांग के इनुसार बढ़ी हुई दर का लाभ का मुआवजा देने का फैसला दिया। उनका मुआवजा कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पांच लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ करने का आदेश दिया
Section 28-A आखिर क्या है और किसानों के लिए क्यों अहम है?
Land Acquisition Act, 1894 की Section 28-A को समान स्थिति वाले भूमि मालिकों के बीच मुआवजे की असमानता दूर करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसका फायदा उन लोगों को मिल सकता है जिनकी जमीन उसी समान अधिसूचना के तहत अधिग्रहित हुई हो। अदालत ने कहा कि Section 28-A को इस तरह पढ़ना चाहिए जिससे समान स्थिति वाले किसानों या भू मालिकों के बीच असमानता कम हो।ताजमहल के पास हमारी जमीन, 200 करोड़ मुआवजा दे सरकार, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से कैसे मजबूत हुआ रंगजी ट्रस्ट का दावा
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