हाईकोर्ट: किसी मुकदमे के समयबद्ध निस्तारण का निर्देश देने से बचने की जरूरत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मामलों की प्राथमिकता तय करना संबंधित अदालत का अधिकार है, न्यायालयों को सामान्य परिस्थितियों में अधीनस्थ अदालतों को किसी मुकदमे के समयबद्ध निस्तारण का निर्देश देने से बचना चाहिए।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a496b6a34de071e400b9045","slug":"prioritizing-pending-cases-is-the-trial-courts-prerogative-high-court-allahabad-news-c-3-ald1024-921011-2026-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करना ट्रायल कोर्ट का अधिकार : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करना ट्रायल कोर्ट का अधिकार : हाईकोर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबित मामलों की प्राथमिकता तय करना संबंधित ट्रायल कोर्ट का अधिकार है। न्यायालयों को सामान्य परिस्थितियों में अधीनस्थ अदालतों को किसी मुकदमे के समयबद्ध निस्तारण का निर्देश देने से बचना चाहिए।
इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के एक दीवानी मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश देने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने राम प्रसाद एवं आठ अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने कानपुर नगर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित सिविल वाद के शीघ्र निस्तारण के लिए समयबद्ध आदेश जारी करने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) के निर्णय में स्पष्ट किया है कि न्यायालयों को सामान्यतः अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं करनी चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे निर्देश दिए जा सकते हैं। मामलों के निस्तारण की प्राथमिकता तय करने का अधिकार संबंधित अदालत के विवेक पर छोड़ना ही न्यायसंगत है।
विज्ञापन
हालांकि, कोर्ट ने याचियों को संबंधित ट्रायल कोर्ट में शीघ्र निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र देने की छूट दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित न्यायालय अपने यहां लंबित मामलों की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उस आवेदन पर विधि के अनुसार निर्णय ले।
विज्ञापन
इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के एक दीवानी मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश देने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने राम प्रसाद एवं आठ अन्य की याचिका पर दिया। याचियों ने कानपुर नगर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित सिविल वाद के शीघ्र निस्तारण के लिए समयबद्ध आदेश जारी करने की मांग की थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) के निर्णय में स्पष्ट किया है कि न्यायालयों को सामान्यतः अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं करनी चाहिए। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे निर्देश दिए जा सकते हैं। मामलों के निस्तारण की प्राथमिकता तय करने का अधिकार संबंधित अदालत के विवेक पर छोड़ना ही न्यायसंगत है।
विज्ञापन
हालांकि, कोर्ट ने याचियों को संबंधित ट्रायल कोर्ट में शीघ्र निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र देने की छूट दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित न्यायालय अपने यहां लंबित मामलों की स्थिति और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उस आवेदन पर विधि के अनुसार निर्णय ले।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेगा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़, भू स्वामी पहले से मिलने वाला पैसा शामिल होगा

รाष्ट्रीय सभा में वास्तुकला कानून संशोधन पर चर्चा

कानून के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती जिम्मेदारी

विधि प्रसार एवं शिक्षा संबंधी कानून (संशोधित) पर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के मुआवजे में किया बदलाव, 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का निर्धारण

अमेरिकी धर्म-नीति और भारत के संप्रभु वित्त कानून: एक टकराव

उच्च न्यायालयों को एनसीएलटी के आदेशों के खिलाफ रिट पर विचार नहीं करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट जजों के तबादले की सिफारिश की
ताज़ा ख़बरें
- कौन हैं वो 4 जज जो बनेंगे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस? कॉलेजियम ने की सिफारिश
- प्रांतीय राष्ट्रीय सभा के प्रतिनिधिमंडल ने मसौदा कानूनों पर चर्चा की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश की
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्टों में नए चीफ जस्टिसों की नियुक्ति की सिफारिश की
- केंद्र सरकार ने मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्तियों को अधिसूचित किया
- राष्ट्रीय सभा पूर्ण सत्र में प्रकाशन कानून पर चर्चा
- वित्त और बैंकिंग क्षेत्र के तीन कानूनों में संशोधन पर राष्ट्रीय सभा की चर्चा
- राष्ट्रीय सभा ने वित्त और बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों पर चर्चा की

