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उद्धव गुट बोला-पहले बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हो: सुप्रीम कोर्ट में अपील- असली शिवसेना और पार्टी सिंबल किसका, यह बाद में देखें

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18 अगस्त 2026 को 08:54 pm बजे
उद्धव गुट बोला-पहले बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हो:  सुप्रीम कोर्ट में अपील- असली शिवसेना और पार्टी सिंबल किसका, यह बाद में देखें

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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उद्धव गुट बोला-पहले बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हो:सुप्रीम कोर्ट में अपील- असली शिवसेना और पार्टी सिंबल किसका, यह बाद में देखें

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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर लगातार छठे दिन सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे गुट ने कोर्ट से कहा कि असली शिवसेना किसकी, इसका फैसला विधायकों की अयोग्यता से जुड़े फैसले के बाद होना चाहिए।

मामला CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने दी। बेंच 2024 में दायर उद्धव गुट की 2 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट में उद्धव ठाकरे का पक्ष एडवोकेट कपिल सिब्बल ने रखा। उद्धव गुट का कहना है कि पहले यह तय हो कि बागी विधायक अयोग्य हैं या नहीं, इसके बाद चुनाव आयोग तय करे कि असली शिवसेना कौन सी है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और पार्टी का नाम और धनुष-बाण निशान दे दिया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस मामले पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी।

39 विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला शिवसेना के 39 बागी विधायकों से जुड़ा है। जिन्हें 10 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अयोग्य नहीं माना था और विधानसभा में बहुमत के आधार पर शिंदे गुट को असली शिव सेना घोषित किया था।

सिब्बल ने इसी फैसले का हवाला देते हुए कहा- चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने कानून का गलत मतलब निकाला है। उन्होंने विधायकों की संख्या में बहुमत और राजनीतिक पार्टी को एक ही मान लिया, जबकि दोनों अलग चीजें हैं।

उन्होंने दलील दी- चुनाव आयोग को यह तय करना चाहिए कि असली पार्टी कौन-सी है। अगर इन विधायकों को आखिर में अयोग्य ठहराया जाता है, तो विधानसभा में उनकी संख्या को नहीं गिना जाना चाहिए।

सिब्बल ने सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया

सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि विधायी दल में बंटवारे का मतलब अपने आप राजनीतिक दल में बंटवारा नहीं होता।

इससे पहले 13 अगस्त की सुनवाई के दौरान भी उद्धव गुट ने कहा था कि संविधान के प्रावधानों की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे उस गलती को बढ़ावा मिले जिसे रोकने के लिए दलबदल विरोधी कानून बनाया गया है।

शिवसेना की मौजूदा स्थिति क्या है

महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में दर्ज शिवसेना पर फिलहाल चुनाव आयोग का 17 फरवरी 2023 वाला फैसला लागू है। यानी आधिकारिक तौर पर ‘शिवसेना’ नाम और ‘धनुष-बाण’ चिह्न एकनाथ शिंदे गुट के पास है। उद्धव गुट शिवसेना (UBT) के नाम से और ‘मशाल’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ती आ रही है।

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