श्रीदेवी की चेन्नई जमीन के मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट ने बोनी कपूर व बेटियों को नोटिस भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई में स्थित 4.7 एकड़ श्रीदेवी की संपत्ति के हिस्से को लेकर चल रहे दावों पर याचिका का उत्तर माँगा और अगले सुनवाई तक मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने का आदेश दिया। दावे करने वाले भाई‑बहनों ने कहा है कि जमीन उनका पारिवारिक उत्तराधिकार है और पुराने बिक्री दस्तावेज़ों को अमान्य घोषित करने की मांग कर रहे हैं, जबकि बोनी कपूर और उनकी बेटियों जान्हवी‑खुशी ने इसे खारिज करने की अपील की है। उच्च न्यायालय ने पहले ही इस दावे को सीमित समय‑सीमा के कारण बर्दाश्त नहीं किया था, और अब अदालत ने केस को फिर से खोलने की मांग पर प्रतिक्रिया का अनुरोध किया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
श्रीदेवी की चेन्नई वाली प्रॉपर्टी पर विवाद: बोनी कपूर, बेटी जाह्नवी और खुशी को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने श्रीदेवी की चेन्नई वाली संपत्ति मामले में सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.
Published : September 16, 2026 at 7:30 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चेन्नई में ईस्ट कोस्ट रोड के पास बॉलीवुड की दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की 4.7 एकड़ की संपत्ति में हिस्से का दावा करने वाले एक मामले को फिर से शुरू करने की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा. साथ ही सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.
यह मामला जस्टिस के वी विश्वनाथन और अरुण पिल्लई की बेंच के सामने आया. बेंच एम सी शिवकामी और उनके भाई एम सी नटराजन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. भाई-बहनों ने अपनी मां चंद्रभानु के साथ मिलकर मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है, जिसने उनका केस खारिज कर दिया था. याचिकाकर्ताओं ने जमीन में हिस्से का दावा करते हुए कहा कि यह उनके दादा की संपत्ति है. सुप्रीम कोर्ट ने श्रीदेवी के पति बोनी कपूर और बेटियों जान्हवी और खुशी कपूर से याचिका पर जवाब मांगा.
याचिकाकर्ता अदालत से यह मांग की है कि उन पुराने रजिस्ट्री कागजातों (Sale Deeds) को नल और वॉइड (Null and Void) यानी पूरी तरह से अवैध और अमान्य घोषित कर दिया जाए. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जो जमीन खरीदी गई थी वह धोखाधड़ी से तैयार की गई.
कपूर और उनकी बेटियों ने दीवानी प्रक्रिया कोड के आदेश 7 रूल 11 के तहत ट्रायल कोर्ट में मुकदमे को खारिज करने की मांग की. ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन पर विचार करने से मना कर दिया कि उठाए गए मुद्दे तथ्यों के विवादित सवाल थे जिनकी जांच सिर्फ ट्रायल चरण पर ही की जा सकती थी.
इसके बाद कपूर ने हाई कोर्ट का रुख किया. यह तर्क दिया गया कि वादियों ने पहली शादी और संपत्ति पर पहले के दावे के तथ्य को दबाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट समेत कई अदालतों ने खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने कहा कि यह दावा परेशान करने वाला था और संपत्ति हड़पने के मकसद से कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल था.
अदालत ने नोट किया कि वादियों को अपने पिता चंद्रशेखरन की पहली शादी के बारे में पता था, फिर भी उन्होंने इसे वाद (मुकदमे) में दबाया और वे क्लास-I लीगल वारिस नहीं थे और इसलिए उनके पास लोकस स्टैंडाई (अदालत में मुकदमा दायर करने या सुनवाई का अधिकार) नहीं था.
हाई कोर्ट ने देखा कि 1988 की सेल डीड के खिलाफ 2023 में दाखिल किया गया केस लिमिटेशन के हिसाब से बार्ड था. उसे यह यकीन नहीं हुआ कि प्लेनटिफ को ट्रांजैक्शन के बारे में 40 साल बाद पता चला. हाई कोर्ट ने कपूर की अपील मान ली और केस खारिज कर दिया.
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