होम›संविधान›सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्त: मौलाना अरशद मदनी ने संविधान‑कानून की समानता पर सवाल उठाए
संविधान

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्त: मौलाना अरशद मदनी ने संविधान‑कानून की समानता पर सवाल उठाए

मौलाना अरशद मदनी ने बुलडोजर से ध्वस्त हुई मस्जिद को लेकर गहरा दुःख जताया और वक्फ बोर्ड में पंजीकृत होने तथा दीर्घकालिक धार्मिक उपयोग के आधार पर पूर्ण कानूनी जांच की माँग की। उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार देता है, इसलिए धार्मिक स्थलों पर लागू होने वाले नियमों में कोई पक्षपात नहीं होना चाहिए।

5 सितंबर 2026 को 02:32 pm बजे
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्त: मौलाना अरशद मदनी ने संविधान‑कानून की समानता पर सवाल उठाए

सौजन्य से:- ABP News

सहारनपुर: 'कानून सबके लिए...', मस्जिद गिराए जाने पर भड़के मौलाना अरशद मदनी

सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद गिराए जाने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी भड़क गए हैं. इस दौरान उन्होंने कई सवाल उठाए हैं.

सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर बुलडोजर की कार्रवाई के बाद सियासत तेज हो गई है. इस बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी की प्रतिक्रिया आई है. मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के मामले पर मौलाना अरशद मदनी ने गहरा दुख जताया है.

उन्होंने इस कार्रवाई को बेहद अफसोसजनक बताते हुए प्रशासन के रवैये और कानून के समान रूप से लागू होने पर सवाल उठाए हैं. मौलाना मदनी ने कहा कि यह मामला केवल एक धार्मिक स्थल को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिकों की समानता और कानून के शासन से जुड़े गंभीर सवाल पैदा होते हैं.

सोशल मीडिया की शेखी, नेताओं संग फोटो और सरकारी न्योते... स्वतंत्र भारद्वाज की पूरी कहानी

अरशद मदनी ने मस्जिद गिराए जाने पर क्या कहा?

अरशद मदनी ने कहा कि यदि संविधान सभी नागरिकों और सभी धर्मों को समान अधिकार देता है, तो कानून लागू करने में अलग-अलग मापदंड क्यों दिखाई देते हैं. जमीयत प्रमुख के अनुसार, मस्जिद को सुबह करीब पांच बजे ध्वस्त किया गया. उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल से जुड़े विवाद में प्रशासनिक कार्रवाई करते समय उसके ऐतिहासिक रिकॉर्ड, धार्मिक उपयोग और कानूनी पक्ष को गंभीरता से देखा जाना चाहिए.

मौलाना मदनी ने दावा किया कि मस्जिद का वक्फ बोर्ड में पंजीकरण मौजूद है और उसका पंजीकरण नंबर 451 बताया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद से जुड़ी जमीन के स्वामित्व और ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर सवाल मौजूद हैं, जिनकी उचित कानूनी जांच जरूरी थी.

उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में कानून की भावना और प्रावधानों का पालन होना चाहिए. साथ ही उन्होंने वक्फ से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मस्जिद के लंबे समय से धार्मिक उपयोग और उसके रिकॉर्ड को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

अरशद मदनी ने कार्रवाई पर उठाया सवाल

मौलाना मदनी ने सवाल उठाया कि यदि अवैध कब्जा या अतिक्रमण हटाना ही प्रशासन की कार्रवाई का आधार है, तो यही नियम हर धर्म और हर समुदाय के धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में सरकारी या सार्वजनिक जमीन पर वर्षों से धार्मिक निर्माण मौजूद हैं. ऐसे में किसी एक मामले में विशेष तेजी और सख्ती से कार्रवाई होने पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है.

उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में ऐतिहासिक दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड पेश किए थे. कमेटी का दावा है कि मस्जिद कलेक्ट्रेट की वर्तमान इमारत से पहले से मौजूद थी. इसके समर्थन में पुराने नगरपालिका और राजस्व रिकॉर्ड सहित अन्य दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाने की बात कही गई थी.

कानूनी पहलुओं की पूरी जांच जरूरी है- अरशद मदनी

मौलाना मदनी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर लंबे समय से लगातार नमाज अदा की जा रही हो और कई पीढ़ियों से लोग उसे मस्जिद के रूप में इस्तेमाल करते रहे हों, तो उसके ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं की पूरी जांच जरूरी है.

उन्होंने कहा कि भारत सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का साझा देश है और संविधान किसी नागरिक के साथ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता. सरकार से किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं की जा रही, बल्कि सभी नागरिकों और धार्मिक स्थलों के लिए कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है.

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून का इस्तेमाल किसी समुदाय के प्रति भेदभाव या अलग रवैया अपनाने के रूप में न दिखे. उन्होंने कहा कि कानून और संविधान की असली ताकत तभी साबित होगी, जब उसका संरक्षण और उसका पालन हर नागरिक के लिए समान रूप से किया जाए.

दिल्ली मेट्रो में खिड़की से वीडियो बनाना पड़ सकता है भारी, DMRC ने दी चेतावनी

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा
संविधान

राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती
संविधान

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन
संविधान

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज
संविधान

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन
संविधान

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
संविधान

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म

ताज़ा ख़बरें