फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी मुआवजे का दावा हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल कब्जा मिलने भर से खरीदार उपभोक्ता नहीं हो जाता। अगर फ्लैट का कब्जा तय समय से देरी से मिलता है तो खरीदार देरी के लिए मुआवजे का दावा कर सकता है। अदालत ने NCDRC के आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया है

सौजन्य से:- Navbharat Times
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल कब्जा मिलने भर से खरीदार का उपभोक्ता होने का दर्जा समाप्त नहीं हो जाता। यदि फ्लैट का कब्जा तय समय से देरी से मिला है, तो उस देरी के लिए मुआवजे का दावा पूरी तरह वैध रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के आदेश को किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद खरीदार उपभोक्ता नहीं रह जाता और वह देरी के लिए मुआवजे की मांग नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि घर खरीदार और रियल एस्टेट कंपनी के बीच हुए एग्रीमेंट में मौजूद आर्बिट्रेशन क्लॉज़ (मध्यस्थता की शर्त) खरीदार को अपनी शिकायतें लेकर कंज्यूमर फोरम जाने से नहीं रोक सकता।क्या है मामला
- यह मामला द्वारका स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां एक खरीदार को फ्लैट मिलने के करीब 22 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार की। अदालत ने वर्ष 2005 में दायर उसकी उपभोक्ता शिकायत को फिर से बहाल करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग को एक वर्ष के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खरीदार की शिकायत केवल फ्लैट का कब्जा पाने की नहीं थी, बल्कि कब्जा देने में हुई देरी के कारण हुए नुकसान की भरपाई की थी। इसलिए कब्जा मिलने के बाद भी मुआवजे का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
- अदालत ने जिला उपभोक्ता आयोग से यह तय करने को कहा है कि क्या वास्तव में कब्जा देने में देरी हुई, क्या इसके लिए बिल्डर जिम्मेदार था, क्या खरीदार ने बिना किसी शर्त के कब्जा स्वीकार किया था और क्या उसे मुआवजा दिया जाना चाहिए।
आर्बिट्रेशन क्लॉज की मौजूदगी पर भी जा सकते हैं अदालत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फ्लैट खरीद समझौते में आर्बिट्रेशन क्लॉज (मध्यस्थता का प्रावधान) मौजूद है, तब भी खरीदार उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है। अदालत ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 उपभोक्ताओं को एक अतिरिक्त वैधानिक अधिकार देता है, जिसे किसी निजी अनुबंध की शर्तों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा कि संसद द्वारा उपभोक्ताओं को दिए गए इस कानूनी अधिकार को किसी एग्रीमेंट की आर्बिट्रेशन क्लॉज के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। इसलिए उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

