उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शराब दुकान के स्थान के बारे में दिया आदेश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्कूल, हॉस्पिटल और धार्मिक स्थल के पास शराब दुकान को लेकर सुनवाई की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जहां-जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं, उस जिले के जिलाधिकारी को एक नया प्रत्यावेदन दें जिस पर छह सप्ताह के भीतर विधि अनुसार निर्णय लिया जाए।

सौजन्य से:- ETV Bharat
स्कूल, हॉस्पिटल और धार्मिक स्थल के समीप शराब दुकान को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई, दिए ये आदेश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हॉस्पिटल, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थानों के समीप शराब की दुकान मामले में अहम सुनाई की.
By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 3, 2026 at 9:31 AM IST
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद भी राष्ट्रीय राजमार्गों, राजकीय राजमार्गो, चिकित्साल्यों, शिक्षण संस्थानों और आवासीय क्षेत्रों के निकट संचालित शराब की दुकानों को तत्काल अन्यत्र स्थानों पर स्थानांतरित करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ती मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता से कहा है कि वे इस संबंध में जहां-जहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं, उस जिले के जिलाधिकारी को फिर से एक नया प्रत्यावेदन दें. जिलाधिकारी छः सप्ताह के भीतर उस पर सुनवाई करते हुए विधि अनुसार निर्णय लें.
मामले के अनुसार नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि ट्रस्ट मानव कल्याण और उनके हितों और अधिकारों की रक्षा करने के लिए कार्य करता है. ट्रस्ट के द्वारा बीते 26 और 27 जून को हरिद्वार के कई क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया, जिसमें पाया गया की हरिद्वार के संवेदनशील स्थानों पर शराब की दुकानें संचालित हो रही हैं. जैसे भूमानंद अस्पताल के निकट और विजडम ग्लोबल स्कूल के 50 मीटर की दूरी पर शराब की दुकान संचालित की जा रही हैं. यही नहीं कई आवासीय कॉलोनियों में भी शराब की दुकानें संचालित हैं. प्रदेश के कई अन्य क्षेत्रों में भी यही हाल है. जिसकी वजह से वहां पर रह रहे नागरिकों, छात्रों , समाज पर बुरा असर पड़ रहा है.
राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, या तो इन्हें हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए या इन्हें बंद करवाया जाए. इस सम्बन्ध में उनके द्वारा मुख्य सचिव, सचिव आबकारी, जिलाधिकारी, पुलिस महानिदेशक और आबकारी आयुक्त को प्रत्यावेदन देकर कहा कि सर्वोच्च न्यायलय ने 15 दिसंबर 2016 को स्टे्ट ऑफ तमिलनाडू बनाम के बबलू के केस में सभी राज्यों को आदेश दिया था कि राष्ट्रीय व राजकीय राजमार्गों से शराब की दुकानें 500 मीटर से दूर होंगी और शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मंदिरों आवासीय क्षेत्रों के नजदीक दुकानें संचालित नही होंगी. इस आदेश का अनुपालन करवाया जाए. लेकिन अभी तक उनके प्रत्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया. जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश का अनुपालन कराए जाने हेतु सरकार को निर्देश दिए जाए.
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