एलिफेंट कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, हाथी कॉरिडोर पर होगा नए सिरे से सर्वे
एलिफेंट कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, हाथी कॉरिडोर पर होगा नए सिरे से सर्वे देहरादून-ऋषिकेश मार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाथी कॉरिडोर को लेकर अहम निर्देश दिए हैं. B…

सौजन्य से:- ETV Bharat
एलिफेंट कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, हाथी कॉरिडोर पर होगा नए सिरे से सर्वे
देहरादून-ऋषिकेश मार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान के विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाथी कॉरिडोर को लेकर अहम निर्देश दिए हैं.
By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 22, 2026 at 10:17 AM IST
देहरादून (उत्तराखंड): देहरादून-ऋषिकेश मार्ग के सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान को लेकर हुए विरोध के बीच हाथी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आए हैं. कोर्ट ने देशभर में हाथियों की आवाजाही के लिए बनाए गए कॉरिडोर की स्थिति को लेकर पर्यावरण एवं वन्यजीव मंत्रालय से नए सिरे से सर्वे कराने और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि कई स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों के चलते हाथी कॉरिडोर बाधित, अवरुद्ध या प्रभावित हुए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह हाथी कॉरिडोर का नया सर्वे कराए और रिपोर्ट में यह जानकारी दे कि कॉरिडोर में आ रही बाधाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. खास तौर पर कोर्ट ने हाथियों की प्राकृतिक आवाजाही को प्रभावित करने वाले उपायों पर गंभीरता दिखाई है. निर्देश में कहा गया है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक मार्ग से हटाने के लिए फायरबॉल, मशाल या किसी अन्य जबरन उपाय का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने इस संबंध में हुल्ला पार्टियों पर विशेष प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता भी बताई है. मंत्रालय को अपनी स्टेटस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि इस दिशा में क्या कार्रवाई की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया है.दरअसल देहरादून-ऋषिकेश नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण की योजना के तहत सात मोड़ समेत अलग-अलग हिस्सों में सड़क को विस्तार देने का काम प्रस्तावित रहा है.
सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में पेड़ कटान को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने विरोध जताया था. लोगों की मांग थी कि सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ वन्यजीवों की आवाजाही को भी प्राथमिकता दी जाए. इस मार्ग पर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी तैयार की गई है. परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जहां वन्यजीव सड़क यातायात से प्रभावित हुए बिना आवाजाही कर सकें. खास तौर पर हाथियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए एलिवेटेड रोड और अंडरपास जैसे उपायों पर काम किया गया है.
परियोजना की शुरुआत के दौरान पेड़ कटान की प्रक्रिया सामने आने के बाद सात मोड़ क्षेत्र में विरोध तेज हुआ था. स्थानीय लोगों के साथ पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी पेड़ बचाने की मांग उठाई. विरोध के बीच राज्य सरकार की ओर से फिलहाल पेड़ कटान पर रोक लगाए जाने की बात सामने आई थी. इस पूरे मामले में वन्यजीव विशेषज्ञों और संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है. सड़क के एलाइनमेंट और वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर लंबे समय तक अध्ययन किए गए हैं.
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया समेत वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और संस्थाओं की ओर से भी सुझाव दिए गए हैं. अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद हाथी कॉरिडोर की वास्तविक स्थिति, उनमें मौजूद बाधाओं और हाथियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा होगी.सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ कटान को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं लगातार उठती रही हैं. ऐसे में अब कॉरिडोर से जुड़े नए सर्वे और केंद्रीय मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी.
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