भव्य तालाबों पर कब्जा करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तैयार! जानें दरभंगा की सच्चाई
दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों पर अतिक्रमण को लेकर एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तालाबों को सही स्थिति में बहाल किया जाए और इनके आसपास से कब्जा हटाया जाए। दरभंगा में 60 सालों में 250 तालाब लुप्त हो चुके हैं और अब यहां केवल 100 से कम तालाब बचे हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट तालाब को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई को तैयार
आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट स्थानीय मुद्दों से जुड़े मामलों में सीधे दखल नहीं देता है। अगर कोई याचिका भी स्थानीय मुद्दों को लेकर दाखिल होती है तो सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने की सलाह दे देता है। लेकिन दरभंगा में लुप्त होते तालाब पोखरों को लेकर दाखिल की गई याचिका की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गया।सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस BUIDCO योजना को लेकर बिहार सरकार से जवाब मांगा है। तालाबों की कानूनी लड़ाई सेवानिवृत्त शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों और जागरूक नागरिकों के एक समूह 'तालाब बचाओ अभियान' (TBA) के बैनर तले लड़ी जा रही है। याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि तालाबों को भरना नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), हाई कोर्ट और खुद सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का खुला उल्लंघन है।याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें
- तालाबों के आसपास से सभी अवैध कब्जों (अतिक्रमण) को तुरंत हटाया जाए।
- इन जल निकायों को साल 1868 और 1960 के नक्शों में दिखाई गई उनकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए।
60 सालों में लुप्त हो गए 250 तालाब
'तालाब बचाओ अभियान' के प्रमुख नारायण चौधरी दशकों से जल निकायों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। नारायण चौधरी ने बताया कि दरभंगा में तालाबों का संकट सालों से गहरा रहा था, लेकिन प्रशासन ने इसे हमेशा नजरअंदाज किया।- 1964 का डिस्ट्रिक्ट गजेटियर के अनुसार दरभंगा को कभी 'तालाबों का शहर' कहा जाता था और यहां 350 तालाब थे।
- वर्तमान में दरभंगा नगर निगम के अनुसार, अब यह संख्या घटकर 100 से भी कम रह गई है। यानी पिछले 60 वर्षों में करीब 250 तालाब गायब हो चुके हैं।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ये तीनों ऐतिहासिक तालाब गंगा सागर, दिग्गी, हराही जो कुल 253 बीघा क्षेत्र में फैले हैं, लेकिन आज इसका 25 फीसदी से अधिक हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। इन्हीं तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। क्योंकि बिहार सरकार खुद वेटलैंड नियमों और न्यायिक आदेशों का उल्लंघन कर इन तालाबों को मिट्टी से भर रही है।
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