होम›संविधान›सुप्रीम कोर्ट ने टोटलाइज़र प्रणाली पर केंद्र को जवाब‑देने का आदेश
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने टोटलाइज़र प्रणाली पर केंद्र को जवाब‑देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम में वोटों की गिनती के लिये टोटलाइज़र लागू करने में कानूनी या व्यावहारिक बाधा है या नहीं, इस पर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण माँगा और चुनाव आयोग को अपना प्रस्ताव पेश करने को कहा। टोटलाइज़र कई ईवीएम के वोटों को एक साथ जोड़ता है जिससे बूथ‑वार परिणाम नहीं दिखते और मतदाता की सुरक्षा का दावा किया जाता है, पर चुनाव आयोग इसे मौजूदा कानून में निहित न होने और पारदर्शिता के जोखिम के कारण अस्वीकार करता है। विधि आयोग ने पहले संवेदनशील क्षेत्रों में इस प्रणाली की सिफारिश की थी।

1 सितंबर 2026 को 09:32 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने टोटलाइज़र प्रणाली पर केंद्र को जवाब‑देने का आदेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर’ प्रणाली लागू करने को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

राजेश चौधरी, नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से पूछा कि ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर’ प्रणाली लागू करने में क्या कोई कानूनी या व्यावहारिक बाधा है और इसके लागू होने से कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है या नहीं। अदालत ने चुनाव आयोग को भी इस संबंध में अपना प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें मांग की गई है कि किसी लोकसभा क्षेत्र के नतीजे घोषित करते समय प्रत्येक बूथ पर मिले वोटों का अलग-अलग आंकड़ा सार्वजनिक करने के बजाय पूरे निर्वाचन क्षेत्र का संयुक्त परिणाम घोषित किया जाए।

क्या है टोटलाइजर?

टोटलाइजर ऐसी व्यवस्था है जिसमें कई ईवीएम के वोटों को एक साथ जोड़कर गिना जाता है। इससे किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को यह पता नहीं चल सकेगा कि किसी खास मतदान केंद्र पर उसे कितने वोट मिले। इसका उद्देश्य मतदाताओं की निजता और चुनाव बाद संभावित प्रताड़ना या हिंसा से सुरक्षा बताया गया है। याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दलील दी कि यदि उदाहरण के लिए 14 ईवीएम के वोट एक साथ गिने जाएं तो किसी उम्मीदवार को किसी खास बूथ के मतदान पैटर्न की जानकारी नहीं मिलेगी। इससे उन इलाकों के मतदाताओं को राजनीतिक बदले की कार्रवाई से बचाया जा सकता है।

सीजेआई ने पूछा- लोकतंत्र को क्या फायदा होगा?

सीजेआई ने मौजूदा बूथवार गिनती व्यवस्था की पारदर्शिता का हवाला देते हुए सवाल किया कि टोटलाइजर से लोकतंत्र को आखिर क्या फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वोटों की गिनती खुली प्रक्रिया के तहत होती है और किसी गड़बड़ी या छेड़छाड़ की स्थिति में उसका पता लगाया जा सकता है। जस्टिस बागची ने हालांकि कहा कि सैद्धांतिक रूप से टोटलाइजर मतदाता की पसंद को गुमनाम रखने का अच्छा तरीका है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसके लिए मौजूदा कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं है तो अदालत इसके इस्तेमाल का निर्देश कैसे दे सकती है।

ईसीआई ने गिनाई आपत्तियां

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में फिलहाल टोटलाइजर लागू करने का विरोध किया है। आयोग के मुताबिक संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 और 1951 तथा चुनाव संचालन नियम, 1961 में इसके इस्तेमाल का कोई प्रावधान नहीं है। आयोग ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में फॉर्म 17सी के जरिए मतदान केंद्र पर डाले गए वोटों और ईवीएम में दर्ज वोटों का बूथवार मिलान होता है। यह व्यवस्था चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और खुद सत्यापन करने की क्षमता की “रीढ़” है। टोटलाइजर लागू होने पर कई ईवीएम के वोट एक साथ जुड़ जाएंगे और किसी एक ईवीएम में गड़बड़ी होने पर वह संयुक्त आंकड़े में छिप सकती है। आयोग ने यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल इस प्रस्ताव का विरोध कर चुके हैं। 2016 में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से राय लेने पर 18 राज्य स्तरीय दलों ने इसका विरोध किया था।

विधि आयोग ने की थी सिफारिश

टोटलाइजर का प्रस्ताव नया नहीं है। चुनाव आयोग ने 2008 में कानून मंत्रालय से चुनाव संचालन नियमों में संशोधन की मांग की थी। बाद में विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में टोटलाइजर के इस्तेमाल की सिफारिश की थी, जहां मतदाताओं को डराने या चुनाव बाद प्रताड़ित किए जाने की आशंका हो। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस पूरे मुद्दे पर अपना रुख बताने को कहा है।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Legalकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा
संविधान

राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती
संविधान

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन
संविधान

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज
संविधान

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन
संविधान

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
संविधान

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म

ताज़ा ख़बरें