सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: शादीशुदा बेटी भी अनुकंपा नौकरी की हकदार
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार स्पष्ट किया है कि किसी भी बेटी को उसके पति के साथ शारीरिक रूप से रहने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि शादी के बाद बेटी का मायके से रिश्ता खत्म मानना व्यावहारिक नहीं है और न ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होता है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ शादीशुदा होने पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने बिहार सरकार की नीति को असंवैधानिक करार दिया, जो तलाकशुदा या परित्यक्ता विवाहित बेटियों को पात्र मानती थी और अन्य शादीशुदा बेटियों को बाहर रखती थी। राज्य सरकार को महिला के आवेदन पर 8 सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश दिया गया।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल तलाकशुदा या परित्यक्ता विवाहित बेटियों को पात्र मानने और अन्य शादीशुदा बेटियों को बाहर रखने वाली नीति संविधान के अनुच्छेद-14 में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है।
जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना वी. वराले की पीठ ने बिहार सरकार की 10 दिसंबर 2014 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के इस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया। अदालत ने एक महिला की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर उसके आवेदन पर मेरिट के आधान पर फैसला करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है कि बेटे और बेटी के बीच किसी तरह का भेदभाव संविधान के अनुरूप नहीं है।राज्य सरकार की इस दलील को भी अदालत ने खारिज कर दिया कि शादी के बाद बेटी पति के घर चली जाती है, इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि विवाह के बाद बेटी क मायके से रिश्ता खत्म मानना न व्यावहारिक है और न ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होता है।
अनुकंपा की नौकरी क्या होती है?
अनुकंपा की नौकरी केंद्र या राज्य सरकार की वह व्यवस्था है जिसमें किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाने या चिकित्सा कारणों से समय से पहले रिटायर्ड हो जाने पर उसके परिवार को वित्तीय संकट से बचाने के लिए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाती है।
लेखक के बारे मेंसंजीव कुमारसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)
संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।
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संजीव कुमार ने पत्रकारिता में स्नातक और मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां उन्होंने हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, स्पेशल खबरों को यूजर के इंटरेस्ट के अनुसार बनाने के तरीके को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने वन इंडिया हिंदी में नेशनल डेस्क पर काम किया। फिर दैनिक जागरण में बिहार-झारखंड की लोकल खबरों पर 1 साल 6 महीने तक काम किया है। इसके बाद नवभारत टाइम्स में पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें
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