सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू-मुस्लिम विवादों का समाधान खोजने के लिए स्पेशल लोक अदालत में भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े विवादों को सुलझाने की पहल की। ये विवाद हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच प्राचीन मंदिरों और मस्जिदों के विवादों से जुड़े हैं। लोक अदालत की कार्यवाही 21-23 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी।

सौजन्य से:- ThePrint Hindi
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और उत्तर प्रदेश के संभल स्थित शाही जामा मस्जिद से जुड़े धार्मिक स्वरूप (रिलिजियस कैरेक्टर) के विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना तलाशने के लिए स्पेशल लोक अदालत में भेज दिया है.
‘समाधान’ नाम से आयोजित होने वाली यह स्पेशल लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी.
लोक अदालत की कार्यवाही से पहले हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को प्री-लोक अदालत सुलह प्रक्रिया में शामिल होने के लिए नोटिस भेजा गया है.
5 जून को सुप्रीम कोर्ट समन्वय समिति की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि इन मामलों को स्पेशल लोक अदालत के जरिए सुलझाने के लिए उपयुक्त माना गया है.
नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ‘समाधान समारोह’ आयोजित कर रहा है, जिसकी शुरुआत 21 अप्रैल 2026 से हुई थी और इसका समापन 21 से 23 अगस्त तक होने वाली स्पेशल लोक अदालत के साथ होगा.
नोटिस में संबंधित पक्षों से कहा गया है कि उनका मामला स्पेशल लोक अदालत में सुनवाई के लिए उपयुक्त पाया गया है.
इस प्रक्रिया के तहत 5 जुलाई को मथुरा में प्री-लोक अदालत सुलह बैठक भी हुई थी. इसमें हिंदू पक्ष के कुछ वादी शामिल हुए, लेकिन मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुए. अब मामले में आगे की कार्यवाही का इंतजार है.
ये तीनों मामले उन दावों से जुड़े हैं, जिनमें हिंदू पक्ष का कहना है कि उत्तर प्रदेश की कुछ ऐतिहासिक मस्जिदें प्राचीन हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं.
ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद 16वीं सदी के काशी विश्वनाथ मंदिर को मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा गिराए जाने के बाद उसी स्थान पर बनाई गई थी.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि मथुरा के 13.37 एकड़ परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद उस स्थान पर बनाई गई, जहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार (गर्भगृह) में हुआ था.
वहीं, संभल शाही जामा मस्जिद विवाद 2024 में दायर याचिका से जुड़ा है. इसमें हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्ष 1526 में बनी मुगलकालीन शाही जामा मस्जिद प्राचीन हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी.
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