सुप्रीम कोर्ट ने एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार दिया
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और कहा कि एनिमेशन कला का एक नया रूप है, जो बच्चों के लिए है। कोर्ट ने फिल्म को रिलीज करने की इजाजत दे दी है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट का एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार
कोर्ट ने कहा,एनिमेशन बच्चों के लिए बनाई गई कला का एक नया रूप है और ऐसी याचिकाओं के कारण इसे रोका नहीं जा सकता.
Published : July 29, 2026 at 1:16 PM IST
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फिल्म महाप्रभु जगन्नाथ की रिलीज के खिलाफ ओडिशा सरकार की याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया. कोर्ट ने कहा कि देश में रचनात्मकता फलती-फूलती है और एनिमेशन बच्चों के लिए है.
इस मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने की. दलीलें सुनने के बाद, पीठ ने अपने पहले के आदेश को बदलने से मना कर दिया, जिसमें फिल्म को रिलीज करने की इजाजत दी गई थी.
पीठ ने कहा कि एनिमेशन बच्चों के लिए बनाई गई कला का एक नया रूप है और ऐसी याचिकाओं की वजह से इसे रोका नहीं जा सकता. पीठ ने कहा, "देश में क्रिएटिविटी है. एनिमेशन बच्चों के लिए है. अब कोई भी किताबें नहीं पढ़ रहा है. ये चीजें आर्ट के रास्ते में नहीं आनी चाहिए."
पीठ ओडिशा सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से स्क्रीनिंग मंजूरी मिलने के बाद एनिमेटेड फिल्म 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज को चुनौती दी गई थी.
27 जुलाई को ओडिशा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की जांच करने की अपील करते हुए कहा कि इस रिलीज से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होगी.
इससे पहले, जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने भगवान जगन्नाथ यात्रा के त्योहारों के बाद 28 जुलाई को या उसके बाद एनिमेटेड फिल्म को पूरे भारत में रिलीज करने की इजाजत दी थी.
जस्टिस नागरत्ना की पीठ ने कहा कि एनिमेटेड मूवी यूट्यूब पर पहले ही रिलीज हो चुकी एक वेब सीरीज पर आधारित थी, और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इसकी स्क्रीनिंग के लिए मंज़ूरी दे दी थी. फिल्म प्रोड्यूसर्स ने उड़ीसा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें एले एनिमेशन्स प्राइवेट लिमिटेड को फिल्म रिलीज करने से रोक दिया गया था.
हाई कोर्ट ने कहा कि भगवान जगन्नाथ को दिखाने पर उठाए गए एतराजों की फिल्म दिखाने से पहले डिटेल में न्यायिक जांच की जरूरत है. हाई कोर्ट की पीठ ने यह अंतरिम आदेश अंगुल के महेश कुमार साहू, पुरी के डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और नीमापाड़ा के उमाशंकर आचार्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
याचिका में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म का सर्टिफिकेशन रद्द करने और ओडिशा में इसकी पब्लिक स्क्रीनिंग पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने अशोक चक्र लगाने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, जानें अदालत ने क्या कहा
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