मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर सरकार का सख्त नियंत्रण
मध्य प्रदेश सरकार कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण की तैयारी में है। सरकार एक नए अधिनियम के तहत सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य करेगी और स्टूडेंट्स की संख्या और कोचिंग क्लास में एक बैच में अधिकतम स्टूडेंट की संख्या निर्धारित करेगी।

सौजन्य से:- ETV Bharat
कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार, टास्क फोर्स के बाद अब बनेगा सख्त कानून
मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर सरकार रखेगी नजर, मोहन यादव सरकार जल्द लाने जा रही अधिनियम, नए कानून में रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य.
By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 7, 2026 at 7:21 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश में बढ़ते कोचिंग संस्थाओं पर मध्य प्रदेश सरकार अब नियंत्रण की तैयारी कर रही है. प्रदेश के कोचिंग संस्थानों को सरकार अब कानून के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है. कोचिग संस्थानों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार जल्द ही अधिनियम लेकर आने जा रही है. इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है. नए कानून के तहत सभी कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. साथ ही कोचिंग क्लास में स्टूडेंट्स की संख्या भी निर्धारित की जा सकती है. यह अधिनियम सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद तैयार कर रही है.
हर कोचिंग संस्थान का होगा रजिस्ट्रेशन
बताया जा रहा है कि नए नियमों में प्रदेश में संचालित होने वाले सभी कोचिंग संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी. कोचिंग संस्थान के लिए स्टूडेंट संख्या के मान से कोचिंग संस्थान की बिल्डिंग का क्षेत्रफल भी होगा. इसके अलावा कोचिंग संस्थान में एक बैच में अधिकतम स्टूडेंट की संख्या अभी तय की जा सकती है. यानी कोचिंग संस्थान की एक क्लास में निश्चित संख्या से ज्यादा को स्टूडेंट को नहीं बैठाया जा सकेगा.
कलेक्टरों को मिल सकते हैं कोचिंग के अधिकार
दरअसल, मध्य प्रदेश के बड़े शहरों खासतौर से इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में तेजी से कोचिंग संस्थान खुल रहे हैं, लेकिन इन कोचिंग संस्थानों पर अभी सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है. नए नियमों में जिला कलेक्टरों को कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई के अधिकार दिए जाएंगे. गड़बड़ी मिलने पर कोचिंग संस्थानों में ताला डालने और उन पर जुर्माना लगाने के भी अधिकार दिए जायेंगे. कोचिंग संस्थान में सुरक्षा के तमाम इंतजाम जरूरी होंगे. संस्थान की बिल्डिंग में आपातकालीन द्वार पर्याप्त वेंटीलेशन स्टूडेंट संख्या के हिसाब से पर्याप्त स्थान होना जरूरी होगा. इसके अलावा काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट भी दे चुकी है कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण के निर्देश
कोटा में पिछले सालों में हुई दुखद घटनाओं को लेकर देशभर में संस्थानों पर नियंत्रण को लेकर चर्चा छिड़ी है. संस्थानों पर नियंत्रण के लिए सर्वोच्च न्यायालय भी निर्देश दे चुकी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्य प्रदेश सरकार पूर्व में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त की निगरानी में टास्क फोर्स गठित कर चुकी है. टास्क फोर्स में स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग की जोड़ा गया था, हालाकि अब राज्य सरकार इसको लेकर अधिनियम लाने जा रही है.
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इसका मतलब क्या है
कोचिंग संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण की तैयारी मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसमें नए कानून के तहत सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, साथ ही स्टूडेंट्स की संख्या और कोचिंग क्लास में एक बैच में अधिकतम स्टूडेंट की संख्या निर्धारित की जा सकती है। यह नियंत्रण कोचिंग संस्थानों की मनमानी को रोकने और छात्रों के हित में लाया जा रहा है। इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि सरकार अब राज्य के शहरों में संचालित होने वाले कोचिंग संस्थानों पर अधिक नियंत्रण करना चाहती है और छात्रों के लिए सुरक्षित और अच्छा शिक्षण वातावरण प्रदान कर सके। इससे राज्य में कोचिंग संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने में मदद मिलेगी।
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