कानून अब तोड़फोड़ और बाधा पहुंचाने वालों को सख्त रूप से मुश्किल में डालेगा
पूर्व रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा, निर्बाध रेल परिचालन और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। रेलवे प्रशासन ने आम नागरिकों से आंदोलन या विवाद के समाधान के लिए वैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों का प्रयोग करने की अपील की है।

सौजन्य से:- Hindustan
अब तोड़फोड़ व बाधा पहुंचाने वालों पर कानून का शिकंजा
जसीडीह प्रतिनिधिरेल परिचालन में बाधा डालने, रेल रोको आंदोलन के नाम पर यात्रियों को परेशानी में डालने और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खि
जसीडीह प्रतिनिधि रेल परिचालन में बाधा डालने, रेल रोको आंदोलन के नाम पर यात्रियों को परेशानी में डालने और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
पूर्व रेलवे का बयान
पूर्व रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा, निर्बाध रेल परिचालन और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। रेलवे प्रशासन ने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार के आंदोलन या विवाद के समाधान के लिए केवल वैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यम अपनाने की अपील की है। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने कहा है कि भारतीय रेल केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवनरेखा है। प्रतिदिन लाखों लोग रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार और पारिवारिक कारणों से रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी भी ट्रेन का परिचालन बाधित होने से केवल रेलवे का काम प्रभावित नहीं होता, बल्कि मरीजों के इलाज, विद्यार्थियों की परीक्षा, श्रमिकों की रोजी-रोटी और हजारों परिवारों की योजनाएं भी प्रभावित होती हैं।
राष्ट्रीय धरोहर की सुरक्षा
उन्होंने कहा कि रेलवे जनता की मेहनत की कमाई से निर्मित राष्ट्रीय धरोहर है। इसकी सुरक्षा केवल रेलवे प्रशासन की नहीं , बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या रेल परिचालन में बाधा उत्पन्न करना सीधे तौर पर आमलोगों की सुविधा और देशहित को प्रभावित करता है। इसलिए किसी भी मांग या समस्या के समाधान के लिए संवाद और कानूनसम्मत प्रक्रिया ही अपनाई जानी चाहिए। रेलवे प्रशासन सभी शिकायतों और सुझावों के समाधान के लिए सदैव उपलब्ध है। पूर्व रेलवे ने बताया कि जन विश्वास अधिनियम-2026 के तहत रेलवे अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में संशोधन कर दंडात्मक प्रावधानों को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। संशोधित धारा-145 के अनुसार रेलवे परिसर में नशे की हालत में पाए जाने, यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करने, अश्लील भाषा का प्रयोग करने या रेलवे की सुविधाओं में बाधा उत्पन्न करने पर तत्काल एक हजार रुपण् का जुर्माना लगाया जाएगा। चेतावनी के बावजूद ऐसी हरकत दोहराने पर छह माह तक की कैद, पांच हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार धारा-146 के तहत रेलवे कर्मचारियों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुंचाने वालों के लिए दंड और जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। धारा-155 के तहत रेलवे नियमों के उल्लंघन पर दो हजार और एक हजार रुपये तक का निश्चित जुर्माना तय किया गया है। यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है तो न्यायालय तीन हजार रुपए तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगा सकता है। वहीं धारा-159 के तहत रेलवे परिसर में यातायात व्यवस्था बाधित करने या रेलवे कर्मियों व पुलिस अधिकारियों के वैध निर्देशों की अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
क्या कहते हैं मुख्य जनसंपर्क अधिकारी :-
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी का संदेश
रेलगाड़ियां केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि देशवासियों की भावनाओं, उम्मीदों और सपनों को भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती हैं। लोग रेल रोको जैसे आंदोलनों और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहें। यात्रियों की सुरक्षा और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध संशोधित प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
शिबराम माझि,
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्व रेलवे।
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