सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस अधिकारी के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है, हाईकोर्ट ने प्रसाद के व्यवहार को अदालत के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
यूपी के आईएएस अधिकारी के खिलाफ जारी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रसाद का व्यवहार अदालत के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रसाद का व्यवहार पहली नजर में अदालत के अधिकार को कमजोर करने की ‘जानबूझकर और सोच-समझकर की गई कोशिश’ जैसा लगता है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर नोटिस जारी कर प्रतिवादियों को 10 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा कि इस दौरान हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों पर रोक रहेगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) प्रसाद ने हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों और अपने खिलाफ की गई टिप्पणी को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराजन ने हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेशों पर रोक लगाने की मांग की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद की आलोचना करते हुए यह निर्देश जारी किया था कि भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए उनकी (प्रसाद) की योग्यता का आकलन करते समय उसके फैसले को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को विचार के लिए भेजा जाए। हाईकोर्ट ने 3 जून को मेघा रायकवार की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी। इस याचिका में राज्य सरकार के सक्षम अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे एक व्यक्ति की कथित गैर-कानूनी हिरासत से उनकी 15 साल की बेटी को मुक्त कराने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह संजय प्रसाद की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर विचार करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कड़ा रुख क्यों अपनाया
हाईकोर्ट ने तब कड़ा रुख अपनाया जब बताया गया कि इस मामले में दाखिल आरोपपत्र में असली आरोपी का नाम नहीं था। हाईकोर्ट ने तथ्यों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपपत्र ‘सुभाष चंद्र और अन्य बनाम यूपी राज्य और अन्य' के मामले में हाईकोर्ट द्वारा जारी पहले के निर्देशों के अनुसार नहीं है। हाईकोर्ट ने उस मामले में यह पक्का करने के लिए विस्तृत निर्देश दिया था कि आपराधिक जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और कानूनी रूप से सही हो।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
तीन माह बाद भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश पेश नहीं किया गया। हाईकोर्ट को बताया गया कि पूर्व में जारी निर्देशों को राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। इसलिए, मामले में, अधिकारी ने हाईकोर्ट को बताया कि जब तक पहले जारी निर्देशों के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब तक उस फैसले में दिए गए निर्देशों को लागू करने के बारे में कोई और आदेश न दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि उसने प्रस्तावित अपील के बारे में और जानकारी का इंतजार करने के लिए मामले को टाल दिया था, लेकिन 3 माह बीतने के बाद भी राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश या फैसला पेश नहीं किया गया।
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