होममुकदमेआयोग ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का दी गलत अर्थ, कैरी बैग के लिए 75 हजार रुपये का मुआवजा मांगने वाली शिकायत खारिज
मुकदमे

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का दी गलत अर्थ, कैरी बैग के लिए 75 हजार रुपये का मुआवजा मांगने वाली शिकायत खारिज

दिल्ली के मध्य जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महिला की शिकायत खारिज कर दी जो मॉल में कैरी बैग के लिए 12 रुपये रुपये मांगने के बाद 75 हजार रुपये का मुआवजा मांग रही थी। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून ग्राहकों को शोषण से बचाने के लिए है, इसे अमीर बनने का जरिया नहीं बनाना चाहिए।

30 जून 2026 को 09:26 am बजे
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का दी गलत अर्थ, कैरी बैग के लिए 75 हजार रुपये का मुआवजा मांगने वाली शिकायत खारिज

सौजन्य से:- Live Hindustan

‘उपभोक्ता संरक्षण कानून अमीर बनने का…’; आयोग ने शिकायकर्ता महिला को दिया झटका

दिल्ली के उपभोक्ता आयोग ने मॉल में कैरी बैग के लिए रुपये लेने के बदले 75 हजार रुपये का मुआवजा मांगने वाली महिला की शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून ग्राहकों को शोषण से बचाने के लिए है, इस अमीर बनने का जरिया न बनाएं।

दिल्ली के मध्य जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून (सीपीए) उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने के लिए बनाया गया एक कल्याणकारी कानून है, न कि रातोंरात अमीर बनने या अनुचित लाभ कमाने का कोई जरिया है।

आयोग की अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की बेंच ने 12 रुपये के एक पेपर कैरी बैग के बदले कुल 75 हजार रुपये का मुआवजा मांगने वाली महिला की शिकायत को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

क्या है मामला

यह मामला आदर्श नगर निवासी प्रीति अग्रवाल से जुड़ा है। उन्होंने पैसिफिक मॉल स्थित ‘लाइफस्टाइल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड’ के स्टोर से खरीदारी की थी। उनके पास खुद का थैला नहीं था, जिसके बाद स्टोर के कर्मचारी ने बिलिंग काउंटर पर ही उन्हें बता दिया था कि पेपर कैरी बैग के लिए 12 रुपये अतिरिक्त लगेंगे। महिला ने उस वक्त तो पैसे दे दिए, लेकिन बाद में इसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी बताते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा दी। उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के एक मामले का हवाला देकर दलील दी कि कंपनियां अपने ब्रांड का लोगो छपे कैरी बैग के लिए ग्राहकों से पैसे नहीं वसूल सकतीं। महिला ने 12 रुपये की रिफंड राशि के साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए 50 हजार और कानूनी खर्च के रूप में 25 हजार रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

खुद का थैला साथ ले जाने की नसीहत दी

फैसले के अंत में आयोग ने पर्यावरण संरक्षण की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सिंगल-यूज प्लास्टिक और पेपर बैग दोनों ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। प्लास्टिक से प्रदूषण फैलता है और पेपर बैग के लिए पेड़ काटे जाते हैं। आयोग ने अपील की कि भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित धरती सौंपने के लिए हम सभी को शॉपिंग के दौरान अपने खुद के कपड़े के थैले साथ ले जाने की आदत डालनी चाहिए।

सामाजिक संदेश को विज्ञापन मानना गलत

आयोग के समक्ष जब मूल पेपर कैरी बैग पेश किया गया, तो कहानी पूरी तरह बदल गई। आयोग ने पाया कि उस बैग पर लाइफस्टाइल कंपनी का कोई नाम, लोगो या विज्ञापन मौजूद ही नहीं था। बैग के दोनों तरफ पर्यावरण अनुकूल ‘रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ का सार्वभौमिक प्रतीक व संदेश छपा हुआ था। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस सामाजिक संदेश को किसी भी सूरत में कंपनी का व्यावसायिक विज्ञापन नहीं माना जा सकता। हालांकि, शिकायतकर्ता महिला की उम्र और उनके आदतन मुकदमेबाज न होने को ध्यान में रखते हुए आयोग ने उन पर कोई जवाबी जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन
मुकदमे

बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी
मुकदमे

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई
मुकदमे

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
मुकदमे

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी
मुकदमे

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद
मुकदमे

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता
मुकदमे

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत

ताज़ा ख़बरें