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अमेरिकी अपील अदालत ने ट्रम्प के डाक‑मतदान प्रतिबंध को बरकरार रखा, कई राज्यों ने शुरू किया मतपत्रों का प्रसारण

एक अपील अदालत ने राष्ट्रपति ट्रम्प के डाक से मतदान को सीमित करने वाले आदेश पर रोक जारी रखी, जबकि इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट भी सुन रहा है। इस बीच, कई राज्य मध्यावधि चुनाव के लिए मतपत्रों को डाक के जरिए भेजना शुरू कर चुके हैं। परिणामस्वरूप ट्रम्प के आदेश का भविष्य अनिश्चित ही बना हुआ है।

10 सितंबर 2026 को 10:04 pm बजे
अमेरिकी अपील अदालत ने ट्रम्प के डाक‑मतदान प्रतिबंध को बरकरार रखा, कई राज्यों ने शुरू किया मतपत्रों का प्रसारण

सौजन्य से:- Amar Ujala

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अमेरिका: ट्रंप के डाक मतदान के आदेश पर अदालत की रोक बरकरार, राज्यों में भेजे जा रहे मतपत्र; आगे क्या होगा?

Fri, 11 Sep 2026 12:32 AM IST

निर्मल कांत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।

Published by: निर्मल कांत

Updated Fri, 11 Sep 2026 12:32 AM IST

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डाक से मतदान को सीमित करने के आदेश पर अदालत ने रोक बरकरार रखी है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है और कई राज्यों में मतपत्र भेजे जा चुके हैं। ऐसे में ट्रंप के आदेश का क्या होगा? पढ़िए रिपोर्ट

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विस्तार

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अमेरिका की एक अपील अदालत ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश पर रोक जारी रखी, जिसमें डाक से होने वाले मतदान को सीमित करने की बात कही गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट भी इसी मामले पर विचार कर रहा है। इस बीच राज्यों ने मध्यावधि चुनाव के लिए डाक से मतपत्र भेजना शुरू कर दिया है।

अदालत ने क्या फैसला बरकरार रखा?

तीन जजों की पीठ ने पिछले हफ्ते लगाई गई शुरुआती रोक हटाने से इनकार कर दिया। यह रोक अमेरिकी जिला अदालत की जज इंदिरा तलवानी ने लगाई थी। इसके तहत अमेरिकी डाक सेवा को ट्रंप के आदेश को लागू करने से रोका गया है।

ट्रंप के आदेश में क्या कहा गया था?

डाक सेवा ने कहा था कि वह उन राज्यों के मतपत्र नहीं पहुंचाएगी, जिन्होंने पहले अपने लिफाफे के डिजाइन को संघीय सरकार से मंजूरी नहीं दिलाई है। इसके अलावा, राज्यों को मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी जमा करनी होगी। हालांकि, यह पोर्टल अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है।

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चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इन शर्तों को पूरा करना संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि अलबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन में डाक से मतपत्र भेजे जाने शुरू हो चुके हैं।

ये भी पढ़ें: अमेरिका में सख्ती की तैयारी: नौकरी जाने पर 60 दिन की मोहलत छिन सकती है, एच-1बी वीजाधारकों को छोड़ना पड़ेगा देश

जजों ने ट्रंप के आदेश पर क्या कहा?

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से नियुक्त तीनों जजों ने याचिकाकर्ताओं की दलील से सहमति जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के पास राज्यों की चुनाव नीति को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने अपने फैसले में क्या लिखा?

जजों ने कहा कि अपील करने वाले यह मजबूत आधार नहीं दिखा पाए हैं कि जिला अदालत ने यह तय करने में गलती की कि अंतिम नियम संभवतः गैरकानूनी है। यहां अंतिम नियम से मतलब उस नियम से है, जिसे डाक सेवा ने ट्रंप के आदेश को लागू करने के लिए जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट में मामला कहां पहुंचा?

अपील अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट पहले से इसी मामले पर विचार कर रहा है। यह मामला मध्यावधि चुनाव से पहले चल रही तेज कानूनी लड़ाई का हिस्सा है। इस बीच राज्यों ने डाक से मतपत्र भेजना शुरू कर दिया है।

वॉशिंगटन डीसी में डेमोक्रेट और नागरिक अधिकार संगठन भी एक अलग मुकदमा लड़ रहे हैं। वे भी ट्रंप के कार्यकारी आदेश को रोकने की मांग कर रहे हैं। पहली अपील अदालत ने भी तलवानी की लगाई गई पिछली रोक को बरकरार रखा था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया से जुड़े एक फैसले में उस रोक को हटा दिया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने यह तय नहीं किया था कि ट्रंप की योजना संविधान के मुताबिक है या नहीं।

नए मुकदमे क्यों दायर किए गए?

डाक सेवा ने डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों के नियम को अंतिम रूप दिया। इसके तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं ने नए मुकदमे दायर कर दिए।

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अदालत ने क्या फैसला बरकरार रखा?

तीन जजों की पीठ ने पिछले हफ्ते लगाई गई शुरुआती रोक हटाने से इनकार कर दिया। यह रोक अमेरिकी जिला अदालत की जज इंदिरा तलवानी ने लगाई थी। इसके तहत अमेरिकी डाक सेवा को ट्रंप के आदेश को लागू करने से रोका गया है।

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ट्रंप के आदेश में क्या कहा गया था?

डाक सेवा ने कहा था कि वह उन राज्यों के मतपत्र नहीं पहुंचाएगी, जिन्होंने पहले अपने लिफाफे के डिजाइन को संघीय सरकार से मंजूरी नहीं दिलाई है। इसके अलावा, राज्यों को मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी जमा करनी होगी। हालांकि, यह पोर्टल अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है।

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चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा?

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इन शर्तों को पूरा करना संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि अलबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन में डाक से मतपत्र भेजे जाने शुरू हो चुके हैं।

ये भी पढ़ें: अमेरिका में सख्ती की तैयारी: नौकरी जाने पर 60 दिन की मोहलत छिन सकती है, एच-1बी वीजाधारकों को छोड़ना पड़ेगा देश

जजों ने ट्रंप के आदेश पर क्या कहा?

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन की ओर से नियुक्त तीनों जजों ने याचिकाकर्ताओं की दलील से सहमति जताई। उनका कहना है कि राष्ट्रपति के पास राज्यों की चुनाव नीति को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं है।

अदालत ने अपने फैसले में क्या लिखा?

जजों ने कहा कि अपील करने वाले यह मजबूत आधार नहीं दिखा पाए हैं कि जिला अदालत ने यह तय करने में गलती की कि अंतिम नियम संभवतः गैरकानूनी है। यहां अंतिम नियम से मतलब उस नियम से है, जिसे डाक सेवा ने ट्रंप के आदेश को लागू करने के लिए जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट में मामला कहां पहुंचा?

अपील अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सुप्रीम कोर्ट पहले से इसी मामले पर विचार कर रहा है। यह मामला मध्यावधि चुनाव से पहले चल रही तेज कानूनी लड़ाई का हिस्सा है। इस बीच राज्यों ने डाक से मतपत्र भेजना शुरू कर दिया है।

वॉशिंगटन डीसी में डेमोक्रेट और नागरिक अधिकार संगठन भी एक अलग मुकदमा लड़ रहे हैं। वे भी ट्रंप के कार्यकारी आदेश को रोकने की मांग कर रहे हैं। पहली अपील अदालत ने भी तलवानी की लगाई गई पिछली रोक को बरकरार रखा था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया से जुड़े एक फैसले में उस रोक को हटा दिया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने यह तय नहीं किया था कि ट्रंप की योजना संविधान के मुताबिक है या नहीं।

नए मुकदमे क्यों दायर किए गए?

डाक सेवा ने डाक से भेजे जाने वाले मतपत्रों के नियम को अंतिम रूप दिया। इसके तुरंत बाद याचिकाकर्ताओं ने नए मुकदमे दायर कर दिए।

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