अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला, प्रवासियों के वर्क परमिट रद्द करने पर रोक
ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी अदालत से बड़ा झटका लगा है, अदालत ने प्रवासियों के वर्क परमिट छीनने के फैसले पर रोक लगाई है। इस फैसले से लाखों प्रवासियों को राहत मिलेगी जो अपनी नौकरियों को खोने के डर से जूझ रहे थे।

सौजन्य से:- Navbharat Times
किसने किया था मुकदमा
इस गठबंधन ने 'यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज' (USCIS) को उन नीतियों को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए मुकदमा किया था, जिन्हें कांग्रेस ने पिछले साल नए इमिग्रेशन प्रतिबंध लागू करने के लिए बनाया था। गॉर्टन का आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक वह यह तय नहीं कर लेते कि ट्रंप प्रशासन की नीति पर लंबे समय के लिए रोक लगाई जाए या नहीं। जज ने कहा कि वह 5 अगस्त तक इस पर फैसला सुनाएंगे। USCIS ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2024 में जारी किया था कानून
ट्रंप के खास टैक्स और खर्च कानून को रिपब्लिकन-नेतृत्व वाली कांग्रेस ने जुलाई 2025 में पास किया था। इस कानून के तहत पहली बार शरण के लिए आवेदन करने पर फीस लगाई गई और 'टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस' (TPS) वाले लोगों के लिए रोज़गार की अनुमति पर प्रतिबंध लगाए गए। यह एक ऐसा स्टेटस है जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा या अन्य संकटों से जूझ रहे देशों के प्रवासियों को अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देता है, जब तक कि उनके लिए अपने देश लौटना सुरक्षित न हो।
ट्रंप प्रशासन के फैसले से लाखों लोगों पर अटकी थी तलवार
ट्रंप प्रशासन, रिपब्लिकन राष्ट्रपति के सख्त इमिग्रेशन एजेंडे के तहत, एक दर्जन से ज्यादा देशों के लोगों के लिए TPS खत्म करना चाहता है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने हैती और सीरिया के हजारों अप्रवासियों के मामले में ऐसा करने की अनुमति दे दी थी। लिबरल कानूनी समूह 'डेमोक्रेसी फॉरवर्ड' द्वारा दायर मुकदमे में वादियों ने तर्क दिया कि USCIS ने नए कानून के प्रावधानों को गैर-कानूनी तरीके से लागू किया है और इसकी नीतियों को रोका जाना चाहिए। खासकर उस नीति को, जिसके कारण अल साल्वाडोर, सूडान और यूक्रेन के हजारों TPS धारक बुधवार से काम करने की अपनी क्षमता खो सकते हैं।
जज ने फीस पर नहीं दी राहत
जज गॉर्टन ने मंगलवार को USCIS को फिलहाल फीस लेने से रोकने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि एजेंसी उन लोगों के वर्क परमिट रद्द नहीं कर सकती या उन पर कोई और जुर्माना नहीं लगा सकती जो फीस नहीं भर पाते हैं। यह केस बोस्टन में दायर किया गया था, जो ट्रंप के एजेंडे को चुनौती देने वालों के बीच एक लोकप्रिय जगह है। यह केस अदालत के उन कुछ जजों में से एक के पास पहुंचा जिन्हें डेमोक्रेट ने नियुक्त नहीं किया था
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