इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की भारतीयता पर दावों को खारिज, लखनऊ पीठ से मिली बड़ी राहत
लोकसभा नेता राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका में याचिकाकर्ता ने कोई ठोस दस्तावेज पेश न कर पाते हुए अदालत ने उसे खारिज कर दिया। पिछले 2015 और 2019 में भी इसी मुद्दे पर दायर याचिकाओं को उच्च न्यायालय ने उचित प्रक्रिया बताई थी। याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया और न्यायालय ने उसे स्वीकार कर दिया।

सौजन्य से:- Jagran
राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी राहत, नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
Rahul Gandhi: कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि इसी मुद्दे को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से पहले भी 2015 और 2019 में याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं।
HighLights
- याचिकाकर्ता ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप के समर्थन में पेश नहीं कर सका कोई ठोस दस्तावेज
- राहुल गांधी ने पर लगाया था वर्ष 2003 में ब्रिटिश नागरिक होने का आरोप
विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता एवं रायबरेली से लोकसभा सदस्य राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका को याचिकाकर्ता के वापस लेने के बाद खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी चौधरी की पीठ ने बुधवार को स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका।
अशोक पाण्डेय और एक अन्य की ओर से दाखिल रिट याचिका में राहुल गांधी उर्फ राउल विंची के रायबरेली से लोकसभा सदस्य के रूप में पद पर बने रहने के अधिकार को चुनौती देते हुए क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक नहीं बल्कि ब्रिटेन के नागरिक हैं।
कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि इसी मुद्दे को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से पहले भी 2015 और 2019 में याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। वर्ष 2015 की याचिका को हाई कोर्ट की समन्वय पीठ ने खारिज करते हुए कहा था कि नागरिकता संबंधी शिकायत के निस्तारण के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत केंद्र सरकार के समक्ष जाना होगा। 2019 में भी इसी मुद्दे पर दाखिल याचिका में केंद्र सरकार के समक्ष प्रतिनिधित्व करने की स्वतंत्रता दी गई थी।
वर्तमान याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने वर्ष 2003 में ब्रिटेन में पंजीकृत कंपनी बैकऑप्स लिमिटेड में स्वयं को निदेशक और प्रमुख शेयरधारक बताते हुए ब्रिटिश नागरिक घोषित किया था। इस प्रकरण में सुनवाई के दौरान कोर्ट के आधार पूछे जाने पर याचिकाकर्ता कंपनी या ब्रिटेन के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रिकॉर्ड अथवा ब्रिटिश नागरिकता घोषित करने संबंधी कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
कोर्ट ने कहा कि केवल कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का कथित पत्र, जिसमें राउल विंची नामक व्यक्ति के अध्ययन की पुष्टि बताई गई थी, आरोपों को प्रमाणित नहीं करता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका वापस लिए जाने के रूप में खारिज कर दी।
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