मोहाली लोक अदालत की गमाडा को सख्त चेतावनी
मोहाली की स्थायी लोक अदालत ने गमाडा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की के वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई एयरोसिटी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना प्लॉट आवंटन के मामले में अदालत के आदेश का पालन न करने पर की गई है।

सौजन्य से:- Jagran
मोहाली लोक अदालत का गमाडा पर सख्त रुख, आदेश नहीं मानने पर संपत्तियों की कुर्की के वारंट जारी
मोहाली की स्थायी लोक अदालत ने गमाडा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की के वारंट जारी किए हैं। यह कार्रवाई एयरोसिटी में म ...और पढ़ें
HighLights
- गमाडा की संपत्तियों की कुर्की के वारंट जारी।
- एयरोसिटी में सुविधाओं के बिना प्लॉट आवंटन का मामला।
- अदालत के आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, मोहाली। एयरोसिटी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना प्लॉट आवंटित करने और बाद में स्थायी लोक अदालत के आदेश का पालन नहीं करने पर गमाडा (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथाॅरिटी) को कानूनी झटका लगा है।
जिला लोक अदालत (पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज) ने आदेश की अवहेलना करने पर गमाडा के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसकी चल एवं अचल संपत्तियों की कुर्की (अटैचमेंट) के वारंट जारी कर दिए हैं।
अदालत ने संबंधित अधिकारी को 3 अगस्त 2026 तक वारंट की तामील कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला एयरोसिटी ब्लाॅक-बी के प्लाॅट नंबर 1026 के आवंटी घनश्याम दास बंसल द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है।
याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2011 में योजना के तहत प्लाॅट आवंटित होने और पूरी राशि जमा करने के बावजूद गमाडा वर्षों तक सड़क, सीवरेज, बिजली, स्ट्रीट लाइट और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सका।
इसके साथ ही प्लाट का वास्तविक और विधिवत कब्जा भी नहीं दिया गया, जिससे आवंटी को लगातार मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियां उठानी पड़ीं।
सुनवाई के बाद 16 अप्रैल 2024 को स्थायी लोक अदालत ने गमाडा को एक माह के भीतर प्लाॅट का विधिवत सीमांकन कर कब्जा देने तथा आवंटी को एक लाख रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने पर इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आदेश जे बावजूद गमाडा ने नहीं किया भुगतान
अदालत के आदेश के बावजूद गमाडा द्वारा भुगतान नहीं किए जाने पर आवंटी ने निष्पादन याचिका दायर की। इसके बाद अदालत ने ब्याज सहित 1,41,875 रुपये की वसूली के लिए कुर्की वारंट जारी कर दिए। इस राशि में 1.25 लाख रुपये (मुआवजा एवं मुकदमा खर्च) तथा 16 अप्रैल 2024 से आदेश जारी होने तक का 16,875 रुपये ब्याज शामिल है।
इस सामान को कुर्क करने के दिए गए हैं आदेश
जारी वारंट में सेक्टर-62 स्थित पुडा भवन में गमाडा के एस्टेट ऑफिस तथा गमाडा कार्यालय को अचल संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वहीं चल संपत्तियों में गमाडा अथवा एस्टेट ऑफिसर के नाम पर पंजीकृत वाहन, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर, प्रिंटर, टेलीफोन, मोबाइल फोन, कुर्सियां, टेबल, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, पंखे, नकदी तथा कार्यालय में उपलब्ध अन्य सामान को भी कुर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने माना था, सुविधाओं के बिना कब्जा देना बेकार
इस मामले को देख रहे एडवोकेट जतिन सैनी ने बताया कि अपने विस्तृत फैसले में स्थायी लोक अदालत ने कहा था कि बिना बिजली, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं के किसी आवंटी को प्लाॅट का कब्जा देना व्यावहारिक रूप से निरर्थक है।
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अदालत ने रिकाॅर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और गमाडा द्वारा वर्ष 2017-18 में सड़क, बिजली और अन्य विकास कार्यों के लिए जारी किए गए टेंडरों का हवाला देते हुए माना कि आवंटन के समय आवश्यक विकास कार्य पूरे नहीं थे। इसलिए गमाडा को सेवा में कमी (डिफिशिएंसी इन सर्विस) का दोषी ठहराते हुए मुआवजा देने का आदेश पारित किया गया था।
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