मध्य प्रदेश में 10 साल से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया पर फिर से पेंच फंसा, हाई कोर्ट में नई बेंच करेगी सुनवाई
मध्य प्रदेश में 2016 से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया पर फिर से पेंच फंस गया है, क्योंकि नए नियमों पर सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से लाखों कर्मचारियों की पदोन्नति और नई भर्तियां प्रभावित होंगी।

सौजन्य से:- Jagran
MP में 10 साल से थमी पदोन्नति प्रक्रिया पर फिर फंसा पेच, हाई कोर्ट में नई बेंच करेगी सुनवाई; लाखों कर्मचारियों की चिंता बढ़ी
मध्य प्रदेश में 2016 से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया पर फिर से पेंच फंस गया है, क्योंकि नए नियमों पर सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से ...और पढ़ें
HighLights
2016 से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया पर फिर अटका पेंच।
मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से नई बेंच करेगी सुनवाई।
लाखों कर्मचारियों की पदोन्नति और नई भर्तियां प्रभावित होंगी।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में वर्ष 2016 से अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति रुकी हुई है। इसे शुरू करने के लिए सरकार ने नए नियम तो बनाए लेकिन ये भी कोर्ट में उलझ गए। हाई कोर्ट जबलपुर में इस पर सुनवाई पूरी हो गई और निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। यह जारी होता इसके पहले ही सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हो गई।
ऐसे में अब पहले नई बेंच गठित होगी और फिर एक बार सुनवाई होगी। इसमें समय लग सकता है, जिसका असर नई भर्तियों पर भी पड़ेगा क्योंकि जब तक कर्मचारी पदोन्नत नहीं होंगे, तब तक नए पद उपलब्ध नहीं होंगे।
नए नियमों पर सामान्य वर्ग को आपत्ति
बता दें, पदोन्नति का रास्ता निकालने के लिए सरकार ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श कर नए नियम तैयार किए। सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इस पर आपत्ति उठाते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसकी सुनवाई की। सभी पक्षों का अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
सरकार की ओर से नए नियम के पक्ष में तर्क रखे गए। सभी को सुनने के बाद 17 फरवरी को निर्णय सुरक्षित रख लिया गया। तब से ही यह लंबित है।
इसलिए फंसा पेंच
जबकि, सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए निर्णय को 90 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहना चाहिए। इससे सरकार और कर्मचारियों को उम्मीद जागी थी कि जून के प्रथम सप्ताह में निर्णय सुना दिया जाएगा लेकिन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद पेच फंस गया।
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2016 से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया
प्रदेश में पदोन्नतियां मई 2016 से रुकी हैं क्योंकि हाई कोर्ट ने पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। तब से ही पूरी व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उच्च पद का प्रभार तो दिया लेकिन इससे अधिकारी-कर्मचारियों को कोई वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ। वहीं, नियुक्तियां प्रभावित हो गईं क्योंकि पद रिक्त नहीं हुए।
ढाई लाख पदों पर भर्ती का लक्ष्य होगा प्रभावित
राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा है। 78 हजार से अधिक पदों पर भर्ती हो चुकी है। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने के कारण 13 प्रतिशत पद रुके हुए हैं। इससे 13-14 हजार नियुक्तियां नहीं हो पाईं। भर्ती प्रक्रिया भी केवल उन पदों के लिए हो रही है , जो नए सृजित किए गए हैं। इसमें भी स्वास्थ्य और ऊर्जा विभाग के पद अधिक हैं।
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