मध्य प्रदेश में नेताओं ने अदालत में की दोस्ताना, मानहानि के कई मामले सुलझ गए
मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने अदालत में दोस्ताना किया है। विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान समेत भाजपा नेताओं को माफ किया है, जबकि कार्तिकेय सिंह चौहान ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस वापस लिया है। दिग्विजय सिंह और उमा भारती के मानहानि मामले में भी समझौता हो चुका है।

सौजन्य से:- Jagran
सियासत में तल्खी, अदालत में दोस्ताना: मध्य प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस के नेताओं ने ऐसे खत्म किए मानहानि के मुकदमे
मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच मानहानि के कई मामले अदालतों के बाहर सुलझ गए हैं। विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान व अन्य को म ...और पढ़ें
HighLights
- विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान समेत भाजपा नेताओं को माफ किया।
- कार्तिकेय सिंह चौहान ने राहुल गांधी के खिलाफ केस वापस लिया।
- दिग्विजय सिंह और उमा भारती के मानहानि मामले में भी समझौता।
शशिकांत तिवारी, भोपाल। कई बार कहा जाता है कि राजनेता विरोध दिखाते अधिक हैं करते बहुत कम हैं। सदन के भीतर की बात हो या फिर सड़क और न्यायालय की ही क्यों न हो, मध्य प्रदेश में बहुधा ऐसा देखने को मिलता है। ताजा दो उदाहरण राजनेताओं की न्यायिक लड़ाई के हैं।
समझौते से सुलझे मामले
मानहानि से जुड़े एक मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह को माफ कर दिया। फरवरी 2026 में दोनों पक्षों में सुप्रीम कोर्ट में समझौता हो गया। उधर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय सिंह द्वारा लगाए गए मानहानि के मामले में कार्तिकेय ने राहुल को माफ कर दिया है।
राहुल ने मानी गलती, कार्तिकेय ने किया माफ
वर्ष 2018 में झाबुआ में एक चुनावी सभा के दौरान पनामा पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए राहुल ने कार्तिकेय का नाम लिया था। कोर्ट में राहुल की तरफ से प्रस्तुत लिखित जवाब में कहा गया कि गलती से नाम ले लिया था। इसके बाद कार्तिकेय की सहमति मिली और केस खत्म हो गया। इसी तरह से एक मामले में उमा भारती और दिग्विजय सिंह के बीच समझौता हो चुका है। कुल मिलाकर लड़ाई का अखाड़ा राजनीति ही है। बाकी संबंध दोस्ताना ही हैं।
यह था विवेक तन्खा और शिवराज सिंह का मामला
वर्ष 2021 विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में पंचायत व निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक केस में पेश हुए थे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने निकाय चुनाव में ओबीसी को दिया जाने वाला आरक्षण निरस्त कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उस समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और मंत्री रहते हुए भूपेंद्र सिंह ने मीडिया में दिए बयान में राज्यसभा सदस्य तन्खा को ओबीसी विरोधी बताया था। तन्खा ने इसे छवि धूमिल करने वाला बयान बताकर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था।
खबरें और भी
उन्होंने तीनों के विरुद्ध जबलपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में 10 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करते हुए प्रकरण कायम कराया था। तन्खा ने कहा था कि भाजपा नेताओं ने उन्हें ओबीसी विरोधी बताया, इससे उनकी छवि धूमिल हुई है। इस पर भाजपा नेताओं ने कहा था कि तन्खा ने अखबार में प्रकाशित खबरों को आधार बनाया है, जो मानहानि की शिकायत का आधार नहीं हो सकता। तीनों भाजपा नेता प्रकरण समाप्त कराने के लिए हाई कोर्ट गए। वहां से राहत नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट गए, जहां दोनों पक्षों में समझौता हो गया। तन्खा ने सभी को माफ कर दिया।
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दिग्विजय-उमा भारती के बीच भी हुआ समझौता
ऐसा ही मामला दिग्विजय और उमा भारती के मानहानि के मामले में रहा है। 15 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाने पर दिग्विजय सिंह ने उमा भारती के विरुद्ध मानहानि का मामला लगाया हुआ है। इस मामले में वर्ष 2016 में उमा भारती की तरफ से अदालत में 'मिडिएशन एप्लीकेशन' (समझौते का आवेदन) भी दिया गया था। दिग्विजय सिंह ने शर्त रखी थी कि यदि उमा भारती अदालत में सबके सामने माफी मांग लें, तो वह केस वापस ले लेंगे, लेकिन बात नहीं बनी। बाद में समझौता हो गया।
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