इस्लामिक शासन की साजिश: पीएफआई के 20 सदस्यों पर आरोप तय
पटियाला हाउस स्थित एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 20 सदस्यों पर आरोप तय किए हैं। इन पर 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश रचने का आरोप है। सभी आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलेगा।

सौजन्य से:- Jagran
PFI अध्यक्ष समेत 20 पर आरोप तय, 2047 तक शरिया कानून वाला इस्लामिक शासन लाने का था प्लान
पटियाला हाउस स्थित एनआईए अदालत ने पीएफआई के अध्यक्ष समेत 20 सदस्यों पर आरोप तय किए। इन पर 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन लाने की साजिश रचने का आरोप है ...और पढ़ें
HighLights
- एनआईए कोर्ट ने पीएफआई के 20 सदस्यों पर आरोप तय किए।
- आरोप 2047 तक इस्लामिक शासन स्थापित करने की साजिश का।
- सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया, मुकदमा चलेगा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पाॅपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कई नेताओं समेत 20 सदस्यों और संगठन के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए। सभी आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही। अब अभियोजन पक्ष 29 जुलाई से अपने साक्ष्य पेश करेगा।
साझा षड्यंत्र के तहत काम किया
आरोपितों में पीएफआई के अध्यक्ष ओएमए सलाम, उपाध्यक्ष ईएम अब्दुल रहीमान, महासचिव अनीस अहमद, सचिव अफसर पाशा और संस्थापक अध्यक्ष ई अबूबकर समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।
अदालत ने पांच जून को इन आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। उस समय अदालत ने कहा था कि रिकाॅर्ड पर मौजूद सामग्री को समग्र रूप से देखने पर गंभीर संदेह पैदा होता है कि आरोपितों ने पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद (एनईसी) के माध्यम से एक साझा षड्यंत्र के तहत काम किया।
इस्लामिक शासन स्थापित करने की ख्वाहिश
अदालत के अनुसार, षड्यंत्र का उद्देश्य सशस्त्र संघर्ष के जरिये भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़कर वर्ष 2047 तक या उससे पहले शरिया कानून पर आधारित इस्लामिक शासन स्थापित करना था।
यह मामला अप्रैल 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। जांच के बाद एजेंसी ने पीएफआई समेत 26 आरोपितों के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था।
अदालत ने मार्च और अप्रैल 2023 में आरोपपत्रों पर संज्ञान लिया था। केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में यूएपीए के तहत पीएफआई और उससे जुड़े कई संगठनों पर पांच वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया था।
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